घंटों गेमिंग और ओटीटी देखने वाले युवाओं को DVT का खतरा, पैरों में जम सकता है खून का थक्का
वैस्कुलर सोसाइटी ऑफ इंडिया की चेतावनी: लंबे समय तक बैठे रहने से नसों में खून का बहाव धीमा, थक्के का जोखिम 24 फीसदी तक अधिक
नई दिल्ली, 9 अक्टूबर।
घंटों तक मोबाइल-कंप्यूटर पर गेमिंग करना, ओटीटी पर लगातार शो देखना या ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान एक ही जगह बैठे रहना युवाओं की सेहत पर भारी पड़ सकता है। लंबे समय तक शारीरिक गतिविधि नहीं होने से पैरों की गहरी नसों में खून का थक्का जमने यानी डीप वेन थ्रोम्बोसिस (डीवीटी) का खतरा बढ़ सकता है। वैस्कुलर सोसाइटी ऑफ इंडिया के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि डिजिटल जीवनशैली के कारण युवाओं में लंबे समय तक बैठे रहने की आदत बढ़ रही है, जिसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।
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नई दिल्ली में 8 से 10 अक्टूबर तक आयोजित वैस्कुलर सर्जरी सम्मेलन वीएसआई-एएसवीएस 2026 में विशेषज्ञों ने कहा कि डीवीटी का खतरा अब केवल बुजुर्गों, अस्पताल में भर्ती मरीजों या लंबे समय तक बिस्तर पर रहने वाले लोगों तक सीमित नहीं है। कम उम्र के लोगों में भी निष्क्रिय जीवनशैली और अन्य जोखिम कारकों के कारण यह समस्या हो सकती है। सम्मेलन में भारत और विदेशों से 1,000 से अधिक प्रतिनिधि और 400 से अधिक विशेषज्ञ शामिल हुए हैं।
हर अतिरिक्त घंटे के साथ बढ़ता है खतरा
साइंटिफिक रिपोर्ट्स में 2024 में प्रकाशित एक व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-विश्लेषण में 25 लेखों और 31 अध्ययनों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि सबसे अधिक समय बैठे रहने वाले लोगों में शिराओं में खून का थक्का बनने से जुड़ी समस्या (वीटीई) का जोखिम सबसे कम समय बैठने वालों की तुलना में लगभग 24 फीसदी अधिक था। अध्ययन के अनुसार, बैठने के समय में हर अतिरिक्त घंटे के साथ यह जोखिम करीब दो फीसदी बढ़ा हुआ पाया गया।
विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबे समय तक बैठे रहने के दौरान पैरों की पिंडलियों की मांसपेशियां कम सक्रिय रहती हैं। सामान्य स्थिति में ये मांसपेशियां नसों से खून को वापस हृदय की ओर पहुंचाने में मदद करती हैं। इनकी गतिविधि कम होने पर पैरों की नसों में खून का बहाव धीमा पड़ सकता है, जिससे थक्का बनने की आशंका बढ़ सकती है।
गेमिंग और लगातार शो देखना भी जोखिम
सम्मेलन के आयोजन सचिव और मैक्स अस्पताल, नई दिल्ली में वैस्कुलर एवं एंडोवैस्कुलर सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. तापिश साहू ने कहा कि लंबे समय तक बैठे रहने, स्क्रीन देखने और गेमिंग की आदत वाले युवा मरीजों के जीवनशैली संबंधी पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है। उनके मुताबिक, लगातार चार से छह घंटे तक गेमिंग या ओटीटी देखने के दौरान पैरों की मांसपेशियों की गतिविधि काफी कम हो सकती है। इसलिए डिजिटल जीवनशैली में बीच-बीच में उठकर चलना-फिरना जरूरी है।
विशेषज्ञों ने किशोरों से जुड़े एक अध्ययन का भी उल्लेख किया, जिसमें खून के थक्के की समस्या वाले 11 किशोर शामिल थे। ये सभी प्रतिदिन कम से कम चार घंटे स्क्रीन के सामने बिताते थे और उनका औसत स्क्रीन समय करीब छह घंटे था। इनमें आठ को पैरों की गहरी नसों में थक्का, दो को फेफड़ों तक थक्का पहुंचने से जुड़ी समस्या और एक को सबक्लेवियन नस में थक्का मिला। कई किशोरों में थक्का बनने की आनुवंशिक प्रवृत्ति भी पाई गई। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि लंबे समय तक स्क्रीन देखना अकेला कारण नहीं, बल्कि दूसरे जोखिम कारकों के साथ समस्या को बढ़ाने वाला कारक हो सकता है।
धूम्रपान से तुलना का क्या है मतलब?
वैस्कुलर विशेषज्ञों ने लंबे समय तक बैठे रहने को चार सिगरेट पीने के बराबर नुकसानदायक बताने वाली तुलना को सावधानी से समझने की सलाह दी। दोनों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव और नुकसान पहुंचाने के तरीके अलग हैं। धूम्रपान रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है, जबकि लगातार बैठे रहने से पैरों में खून का बहाव धीमा हो सकता है। इसलिए दोनों को सीधे तौर पर समान मानना उचित नहीं है।
सम्मेलन के आयोजन अध्यक्ष और मेदांता के वरिष्ठ वैस्कुलर सर्जन डॉ. तरुण ग्रोवर ने कहा कि मरीजों की जीवनशैली के बारे में जानकारी लेना अब जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। पहले लंबे समय तक निष्क्रिय रहने का संबंध लंबी यात्रा या अस्पताल में भर्ती होने से जोड़ा जाता था, लेकिन अब डॉक्टरों को यह भी पूछना चाहिए कि युवा कंप्यूटर, गेमिंग उपकरण या ओटीटी स्क्रीन के सामने लगातार कितने घंटे बिताते हैं।
वैस्कुलर सोसाइटी ऑफ इंडिया के वरिष्ठ सर्जन डॉ. भूपेश गर्ग के मुताबिक, मोटापा, शरीर में पानी की कमी, धूम्रपान, हार्मोन संबंधी कारण और खून का थक्का बनने की आनुवंशिक प्रवृत्ति जोखिम को और बढ़ा सकते हैं।
विशेषज्ञों की सलाह है कि स्क्रीन का इस्तेमाल करते समय नियमित अंतराल पर उठें, कुछ कदम चलें और पैरों को सक्रिय रखें। पैर में अचानक सूजन, दर्द या गर्माहट जैसे लक्षण दिखने पर चिकित्सकीय सलाह लें। अचानक सांस फूलने या सीने में दर्द होने पर तत्काल आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें, क्योंकि ये फेफड़ों में खून का थक्का पहुंचने के संकेत हो सकते हैं।
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