मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं, इस्तीफा दें- AIPF
SIR पर रोक और वोटर लिस्ट से नाम हटाने की स्वतंत्र जांच की मांग
Lucknow: ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट (AIPF) की राष्ट्रीय कार्य समिति ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग की है। संगठन ने कहा है कि इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट से स्पष्ट है कि SIR, फॉर्म 6 और मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया को लेकर स्वयं चुनाव आयोग के भीतर गंभीर आपत्तियां उठी हैं।
आपत्ति दर्ज होना एक बेहद गंभीर मामला
फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष S.R. दारापुरी ने जारी बयान में कहा कि यदि आयोग के दो अन्य सदस्यों ने ही आपत्ति दर्ज की है तो यह मामला बेहद गंभीर है। नागरिकों के मताधिकार पर हमला अक्षम्य है। श्री दारापुरी ने आगे कहा कि मतदाता सूची में नाम होना हर नागरिक का लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकार है। किसी भी पात्र नागरिक को अपारदर्शी और मनमानी प्रक्रिया से मताधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।
EROs को पूरी जानकारी तक पहुंच न देना जांच का विषय
उन्होंने कहा कि फॉर्म 6 में बिना वैधानिक आधार के किए गए बदलाव और EROs को पूरी जानकारी तक पहुंच न देना जांच का विषय है। उन्होंने यह भी कहा कि 2023 में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति कानून में बदलाव कर चयन समिति से मुख्य न्यायाधीश को हटाकर प्रधानमंत्री द्वारा नामित मंत्री को शामिल करना भी संस्थागत स्वतंत्रता पर सवाल खड़ा करता है, जिस पर संसद में चर्चा जरूरी है।
AIPF की प्रमुख मांगें-
1. मुख्य निर्वाचन आयुक्त तत्काल इस्तीफा दें,
2. SIR प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगे,
3. फॉर्म 6 में बदलाव और नाम हटाने की स्वतंत्र जांच हो,
4. आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियां और नोटशीट सार्वजनिक की जाएं,
5. हटाए गए पात्र मतदाताओं के मामलों की समीक्षा हो।
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