UP के पांच शहरों में शुरू हुई ‘Bharat Taxi’ सेवा

6 माह में जुड़े 10 लाख से अधिक सारथी, लखनऊ के साथ गोरखपुर, वाराणसी, कानपुर और प्रयागराज में सेवा का शुभारंभ

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लखनऊ, 23 सितंबर।
उत्तर प्रदेश में सहकारी क्षेत्र की टैक्सी सेवा ‘भारत टैक्सी’ का विस्तार हो गया है। बुधवार को लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने ‘भारत टैक्सी’ सेवा का औपचारिक शुभारंभ किया। इसके साथ ही गोरखपुर, वाराणसी, कानपुर और प्रयागराज में भी सेवा शुरू की गई। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत प्रदेश सरकार के कई मंत्री और अधिकारी मौजूद रहे।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना’ पोर्टल का भी शुभारंभ किया। इसके अलावा सहकारिता विभाग के ‘उर्वरक सेतु’ मोबाइल ऐप और उत्तर प्रदेश को-ऑपरेटिव डेटाबेस सेंटर के मोबाइल ऐप की शुरुआत की गई। ‘भारत टैक्सी’ के संस्थागत विस्तार के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी, लखनऊ मेट्रो रेल और लखनऊ पुलिस ने भी सेवा के साथ समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान किया।

छह माह में 10 लाख से अधिक सारथी जुड़े

केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने बताया कि फरवरी 2026 में शुरू हुई ‘भारत टैक्सी’ सेवा से छह माह में 10 लाख से अधिक सारथी जुड़ चुके हैं। सेवा के माध्यम से प्रतिदिन करीब 20 हजार यात्राएं हो रही हैं। अब तक करीब 40 लाख यात्री इससे जुड़ चुके हैं और पिछले छह महीनों में सारथियों के खातों में 100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि पहुंची है।

‘भारत टैक्सी’ का मॉडल ‘ड्राइवर ही मालिक’ के सिद्धांत पर आधारित है। इसके तहत चालक को केवल सेवा प्रदाता के बजाय सहकारी व्यवस्था के भागीदार और मालिक के रूप में जोड़ा गया है। मंत्रालय के अनुसार, इस मॉडल का उद्देश्य चालक की कमाई का अधिकतम लाभ सीधे उसके खाते तक पहुंचाना और उसे निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी देना है।

उत्तर प्रदेश के इन पांच शहरों में अब तक करीब 40 हजार सारथियों का पंजीकरण हो चुका है। इनके जल्द ही यात्रियों को सेवा देने की बात कही गई है।

देश में 8.5 लाख सहकारी समितियां

मोहोल ने कहा कि देश में करीब 8.5 लाख सहकारी समितियां कार्यरत हैं और लगभग 32 करोड़ लोग इनसे जुड़े हैं। सहकारिता क्षेत्र करीब 30 अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय है। उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में सहकारिता मंत्रालय ने 160 से अधिक नई पहलें शुरू की हैं।

उन्होंने कहा कि देशभर में करीब 80 हजार प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) के कम्प्यूटरीकरण का काम करीब 3,000 करोड़ रुपये की लागत से जारी है। पैक्स को अब कृषि ऋण और कृषि गतिविधियों से आगे बढ़ाकर भंडारण, बीमा, जैविक उत्पाद, बीज, सामान्य सेवा केंद्र, जन औषधि केंद्र और पेट्रोल-डीजल वितरण जैसी गतिविधियों से भी जोड़ा जा रहा है।

उत्तर प्रदेश में 54 लाख से अधिक नए सदस्य जुड़े

मोहोल ने बताया कि उत्तर प्रदेश में सदस्यता अभियान के तहत 54 लाख से अधिक नए सदस्य बनाए गए हैं। इनमें करीब 17.5 लाख किसान शामिल हैं। इस अभियान से सहकारी क्षेत्र को करीब 75 करोड़ रुपये का योगदान भी प्राप्त हुआ है।

प्रदेश में करीब 6,300 पैक्स का तीन चरणों में कम्प्यूटरीकरण किया जा रहा है। इसके अलावा लगभग 750 कृषि एवं ग्रामीण सहकारी बैंक इकाइयों के कम्प्यूटरीकरण की दिशा में भी काम चल रहा है। अप्रैल 2026 से अब तक 1,200 से अधिक नई बहुउद्देशीय पैक्स, डेयरी, मत्स्य और अन्य सहकारी समितियां गठित की गई हैं।

पैक्स को ग्रामीण सेवा केंद्रों के रूप में विकसित करने पर जोर

उत्तर प्रदेश में करीब 5,200 पैक्स के माध्यम से सामान्य सेवा केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। करीब 7,000 एम-पैक्स प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र के रूप में काम कर रहे हैं, जबकि 161 एम-पैक्स प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।

मोहोल ने कहा कि सहकारिता को पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़ाकर कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, जैविक उत्पाद, बीज, निर्यात, भंडारण, स्वास्थ्य और अब परिवहन जैसे क्षेत्रों से जोड़ा जा रहा है। उनके अनुसार, ‘भारत टैक्सी’ इसी विस्तार का हिस्सा है।

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