CEC ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा मांगने वाले आंदोलनकारियों का दमन निंदनीय- AIPF
राष्ट्रपति से संवैधानिक लोकतंत्र की रक्षा की मांग की, भेजा पत्र
Lucknow: देश में SIR को रद्द कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा मांग रहे आंदोलनकारियों पर किए जा रहे बर्बर दमन और गिरफ्तारी की ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट (AIPF) ने कड़ी निंदा की है। गांधी जयंती पर विपक्षी दलों, सामाजिक संगठनों और नागरिक समाज के विरोध प्रदर्शन के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए AIPF एवं रोजगार-सामाजिक अधिकार अभियान की ओर से राष्ट्रपति को पत्रक भेजा गया है।
लखनऊ में दिनकर कपूर ने हिस्सेदारी करते हुए दी अपनी गिरफ्तारी

AIPF के राष्ट्रीय अध्यक्ष S.R. दारापुरी की ओर से जारी बयान के मुताबिक, लखनऊ में परिवर्तन चौक पर नागरिक समाज द्वारा आयोजित कार्यक्रम में संगठन के प्रदेश महासचिव दिनकर कपूर ने हिस्सेदारी करते हुए अपनी गिरफ्तारी भी दी।
मुख्य चुनाव आयुक्त की पूरी कार्यवाही संविधान विरोधी
पत्रक में कहा गया कि मुख्य चुनाव आयुक्त की पूरी कार्यवाही संविधान विरोधी, अनधिकृत है। उन्हें अपने पद पर रहने का कोई नैतिक और संवैधानिक अधिकार नहीं है। उन्हें तत्काल प्रभाव से हटाया जाना चाहिए।
शांतिपूर्ण विरोध दर्ज करने की अनुमति न देना लोकतंत्र के लिए अशुभ
पत्र के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट और सरकार द्वारा जंतर- मंतर एवं मुंबई के आजाद मैदान जैसे निर्धारित, घोषित धरना स्थल पर भी शांतिपूर्ण विरोध दर्ज करने की अनुमति न देना लोकतंत्र के लिए अशुभ है। मोदी सरकार को अपनी तानाशाही और दमन कार्रवाइयों से बाज आना चाहिए एवं जबावदेह सरकार की भूमिका निभानी चाहिए।
लोकतंत्र को बचाने के लिए आंदोलन में शामिल होने की भी अपील
फ्रंट ने देश की लोकतांत्रिक ताकतों से संवैधानिक लोकतंत्र को बचाने के लिए आंदोलन में शामिल होने की भी अपील की। AIPF के राष्ट्रीय अध्यक्ष S.R. दारापुरी, सोनभद्र में कृपा शंकर पनिका, सविता गोंड, राजेंद्र प्रसाद गोंड, रूबी सिंह गोंड, आगरा में इंजीनियर दुर्गा प्रसाद, चंदौली में अजय राय आदि ने सैकड़ों हस्ताक्षर युक्त ईमेल से राष्ट्रपति को पत्र भेजा।
हस्ताक्षर युक्त ईमेल से राष्ट्रपति को पत्र भेजने में इन्होंने भी किया सहयोग

प्रयागराज में रोजगार अधिकार अभियान के नेशनल कोऑर्डिनेटर राजेश सचान, अर्जुन लाल, इं. राम बहादुर पटेल, डॉ. B.R. गौतम, सीतापुर में डॉ. बृज बिहारी, झारखंड में विजय सिंह, बिहार में अशोक कुमार एडवोकेट, दिल्ली में कशु शुभ मूर्ति, डॉ. राहुल दास आदि ने सैकड़ों हस्ताक्षर युक्त ईमेल से राष्ट्रपति को पत्र भेजा।
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