लखनऊ में करोड़ों की सरकारी जमीन पर भूमाफियाओं का कब्जा, जांच की मांग

सदरौना में बंजर दर्ज भूमि पर प्लॉटिंग और निर्माण का दावा

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Lucknow: सरोजनी नगर स्थित सदरौना गांव में करोड़ों रुपयों की सरकारी जमीन कब्जा कर उस पर प्लॉटिंग और निर्माण करा लिया गया।इसमें राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों की भी मिलीभगत रही। लखनऊ मंडलायुक्त से सरकारी जमीन को कथित भू-माफियाओं के कब्जे से मुक्त कराने और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। इसके लिए मानक नगर निवासी अभिषेक यादव ने मंडलायुक्त लखनऊ को शिकायती पत्र भेजा है।

जमीन पर अवैध कब्जा कर हो रही प्लाटिंग

शिकायती पत्र के मुताबिक, सदरौना में खसरा संख्या 2017, जिसका रकबा 0.2700 हेक्टेयर तथा खसरा संख्या 2018, जिसका रकबा 0.172 हेक्टेयर है, सरकारी अभिलेखों में बंजर भूमि के रूप में दर्ज है। आरोप है कि उक्त जमीन पर कथित रूप से रामकृष्ण शुक्ला, अनुभव शुक्ला और मनीष यादव कब्जा कर प्लॉटिंग करा रहे हैं। भूखंडों की बिक्री के साथ-साथ निर्माण कार्य भी कराया जा रहा है।

अभिलेखों में बंजर, मौके पर प्लॉटिंग का आरोप

अभिषेक यादव के मुताबिक, सरकारी अभिलेखों में जमीन की स्थिति बंजर दर्ज होने के बावजूद मौके पर उसका व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है। आरोप लगाया कि भूमि की कीमत करोड़ों रुपये होने के कारण इस पर कथित रूप से कब्जा कर प्लॉटिंग का खेल चल रहा है। उन्होंने मंडलायुक्त से राजस्व अभिलेखों और मौके की स्थिति का मिलान कराकर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की है।

राजस्व कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल

शिकायत में नगर निगम लखनऊ में कार्यरत लेखपाल अनुपम मिश्रा समेत तहसील स्तर के कुछ क्षेत्रीय कर्मचारियों की भूमिका को संदिग्ध बताया गया है। आरोप है कि मामले की पूर्व में कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित कर्मचारियों की ओर से अधिकारियों को कथित तौर पर गुमराह करने वाली कई बार झूठी रिपोर्ट भेजकर शिकायतों का निस्तारण कराया गया।

आईजीआरएस निस्तारण पर उठाए सवाल

शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री की आईजीआरएस व्यवस्था का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि कई शिकायतों में शिकायतकर्ता से वास्तविक रूप से संपर्क किए बिना ही फर्जी तरीके से रिपोर्ट लगाकर मामलों को निस्तारित किया जा रहा है। उन्होंने मांग की है कि इस प्रकरण में मौके पर राजस्व अधिकारियों की टीम भेजकर जमीन की पैमाइश, अभिलेखों की जांच और मौके की स्थिति का सत्यापन कराया जाए।

बेनामी संपत्तियों की जांच और मुकदमे की मांग

अभिषेक यादव ने मंडलायुक्त से कथित कब्जे की जांच के साथ ही आरोपित लोगों और संबंधित कर्मचारियों की संपत्तियों की भी जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा, प्लॉटिंग अथवा नियमों के विपरीत निर्माण की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जाए।

लंबे समय से एक ही पटल और सर्किल में कार्यरत कर्मचारियों व अधिकारियों के स्थानांतरण की मांग

शिकायतकर्ता ने लंबे समय से एक ही पटल और सर्किल में कार्यरत कर्मचारियों व अधिकारियों के स्थानांतरण की मांग भी उठाई है। साथ ही सरकारी जमीन के संरक्षण को लेकर उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित कराने की मांग की गई है।

दोषी पाए जाने वाले लोगों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग

अभिषेक यादव ने मंडलायुक्त से पूरे प्रकरण की स्थानीय स्तर पर निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने, सरकारी भूमि की पैमाइश कराकर उसे कथित कब्जे से मुक्त कराने तथा दोषी पाए जाने वाले लोगों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। शिकायत पत्र बुधवार को डाक के माध्यम से मंडलायुक्त कार्यालय भेजा गया।

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