मच्छर भगाने वाले लिक्विड की एक घूंट ने छीन ली थी सांसें, जानें फिर कैसे बची मासूम की जान 

19 माह के मासूम को डॉक्टरों ने मौत के मुंह से निकाला

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नई दिल्ली,

घरों में आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले मच्छर भगाने वाले लिक्विड रीफिल से जुड़ी एक चौंकाने वाली घटना ने अभिभावकों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है। 19 माह का एक मासूम बच्चा मच्छर भगाने वाले लिक्विड रीफिल का तरल पदार्थ निगलने और उसके फेफड़ों में चले जाने के बाद गंभीर रूप से बीमार हो गया। बच्चे की हालत इतनी नाजुक हो गई थी कि उसके जीवित बचने की उम्मीद बेहद कम नजर आ रही थी। हालांकि, सर गंगा राम अस्पताल के चिकित्सकों के अथक प्रयासों और उन्नत उपचार की बदौलत बच्चे की चमत्कारिक रिकवरी हुई और उसे पूरी तरह सुरक्षित अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

परिजनों के अनुसार, बच्चे ने घर में रखे मच्छर भगाने वाले उपकरण तक पहुंच बनाकर उसकी नई रीफिल बोतल के साथ छेड़छाड़ कर दी। आशंका है कि उसने बोतल में मौजूद लगभग पूरा तरल पदार्थ निगल लिया। इसके बाद तरल पदार्थ फेफड़ों में पहुंच गया, जिससे उसकी हालत तेजी से बिगड़ गई।

अस्पताल में जांच के दौरान बच्चे में केमिकल न्यूमोनाइटिस, एस्पिरेशन न्यूमोनिया, गंभीर एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (एआरडीएस), शॉक, एक्यूट किडनी इंजरी और मल्टी-ऑर्गन डिसफंक्शन जैसी जानलेवा जटिलताएं पाई गईं। उसे लंबे समय तक पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) में भर्ती रखकर उन्नत वेंटिलेशन, इनोट्रॉपिक सपोर्ट और किडनी सपोर्ट दिया गया।

चिकित्सकों ने बताया कि उपचार के दौरान कई दिन ऐसे रहे जब बच्चे का ऑक्सीजन स्तर बेहद कम बना रहा और फेफड़ों में स्थायी क्षति होने का खतरा मंडरा रहा था। इसके बावजूद पीआईसीयू टीम ने लगातार प्रयास जारी रखे। डॉ. धीरेन गुप्ता के नेतृत्व में डॉ. सुरेश गुप्ता, डॉ. अनिल सचदेवा और डॉ. नीरज गुप्ता सहित विशेषज्ञों की टीम ने बहु-विषयक उपचार रणनीति अपनाई। ऑक्सीजन स्तर सुधारने के लिए नेबुलाइज्ड इलोप्रोस्ट जैसी आधुनिक सहायक चिकित्सा का भी उपयोग किया गया।

लगातार उपचार के बाद बच्चे की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार होने लगा। सबसे बड़ी बात यह रही कि लंबे समय तक गंभीर ऑक्सीजन की कमी से जूझने के बावजूद बच्चे को कोई न्यूरोलॉजिकल नुकसान नहीं हुआ और वह पूरी तरह सुरक्षित अवस्था में स्वस्थ होकर घर लौट सका।

चिकित्सकों ने इस घटना को सभी अभिभावकों के लिए चेतावनी बताया है। उनका कहना है कि मच्छर भगाने वाले रीफिल, कीटनाशक और अन्य रासायनिक उत्पाद बच्चों की पहुंच से पूरी तरह दूर रखने चाहिए। उपयोग से पहले रीफिल की बोतल, ढक्कन, इलेक्ट्रोड और फिटिंग की जांच करना भी जरूरी है। यदि किसी उत्पाद में ढीलापन, रिसाव या कोई खराबी दिखाई दे तो उसका इस्तेमाल तुरंत बंद कर देना चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि घर में मौजूद ऐसी छोटी-सी लापरवाही कुछ ही मिनटों में जानलेवा हादसे में बदल सकती है। इसलिए बच्चों की सुरक्षा के लिए घरेलू रासायनिक उत्पादों को सुरक्षित स्थान पर रखना और नियमित रूप से उनकी स्थिति की जांच करना बेहद आवश्यक है।

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