बच्चों के जुकाम-बुखार को न समझें मामूली, टीबी भी हो सकती है वजह
लखनऊ में 1448 बाल टीबी मरीज,CMO बोले- लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सीय परामर्श और जांच जरूरी
Lucknow: बच्चों में होने वाले जुकाम-बुखार को अक्सर अभिभावक मौसम में बदलाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही लापरवाही भारी पड़ सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक बुखार, वजन कम होना और शरीर में लगातार दर्द-सूजन टीबी के लक्षण हो सकते हैं। लखनऊ में ऐसे ही दो मामले सामने आए हैं, जो अभिभावकों के लिए चेतावनी हैं।
छह महीने तक बुखार से जूझती रही सानवी
चार वर्षीय सानवी को छह महीने तक रुक-रुककर जुकाम-बुखार होता रहा। परिजन होम्योपैथिक इलाज कराते रहे, अस्थायी आराम मिलता फिर बुखार लौट आता। इसी दौरान वजन भी घटने लगा। बाद में स्वास्थ्य केंद्र पर जांच में टीबी की पुष्टि हुई। पूरा उपचार लेने के बाद अब वह स्वस्थ है।
पैर में काले निशान से सामने आई टीबी
सात वर्षीय श्याम (बदला हुआ नाम) के बाएं पैर में पिछले साल दिसंबर में काला निशान पड़ गया, साथ ही सूजन और दर्द शुरू हो गया। परिजनों ने इसे खेलते समय लगी चोट समझा। एक महीने तक कई डॉक्टरों को दिखाने के बाद भी आराम नहीं मिला। जिला टीबी अस्पताल में बायोप्सी के बाद टीबी निकली। वर्तमान में सिविल अस्पताल की टीबी यूनिट में उसका इलाज अंतिम चरण में है।
CMO ने कहा- लक्षणों को न करें नजरअंदाज

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. N.B. सिंह ने बताया कि बच्चों में ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सीय परामर्श और जांच जरूरी है। टीबी की पुष्टि होने पर दवा का पूरा कोर्स करना चाहिए। समय पर पहचान और सही इलाज से बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हो सकते हैं।
लखनऊ में बाल टीबी की स्थिति
वर्तमान में जनपद में 14 वर्ष तक के कुल 1448 बाल टीबी रोगी उपचाराधीन हैं। इनमें 536 पल्मोनरी (फेफड़ों की टीबी) और 912 एक्स्ट्रा पल्मोनरी (अन्य अंगों की टीबी) के मरीज हैं। कुल मरीजों में 650 लड़के और 798 लड़कियां हैं।
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