विश्व गर्भनिरोधक दिवस: 100% को जानकारी, 75% के मन में सवाल, स्टडी में खुलासा!

KGMU Study: गर्भनिरोधक पर जागरूकता 100%, लेकिन side effects और privacy को लेकर चिंतित हैं युवतियां

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Lucknow: विश्व गर्भनिरोधक दिवस (26 सितंबर) से पहले KGMU के क्वीन मैरी हॉस्पिटल में किया गए एक अध्ययन में चौंकाने वाले तथ्य सामने आया है। 18-24 वर्ष की 100 युवतियों पर हुई इस स्टडी में पता चला कि 100% युवतियों ने किसी न किसी गर्भनिरोधक विधि के बारे में सुना है, लेकिन 75% के मन में अब भी इसके इस्तेमाल, साइड इफेक्ट्स और भविष्य की प्रजनन क्षमता को लेकर सवाल हैं।

अध्ययन में इन्होंने निभाई जिम्मेदारी

यह अध्ययन विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अंजू अग्रवाल के संरक्षण और CoE-AHD की नोडल ऑफिसर प्रो. (डॉ.) सुजाता देव के मार्गदर्शन में काउंसलर सौम्या सिंह ने किया।

स्टडी के मुख्य बिंदु

1. जानकारी के स्रोत बदले: 72% युवतियां जानकारी के लिए ऑनलाइन सर्च करती हैं। Instagram/Reels और ChatGPT अब प्रमुख स्रोत बन गए हैं। 40% को स्कूल/कॉलेज में जानकारी मिली।

2. सबसे बड़ी चिंताएं: 35% के लिए Safety और 33% के लिए Side Effects सबसे बड़ा फैक्टर है। युवतियों को हार्मोनल बदलाव, वजन बढ़ने, पीरियड्स में बदलाव और भविष्य में फर्टिलिटी पर असर का डर है।

3. सोशल मीडिया पर भ्रम: 58% युवतियों ने माना कि सोशल मीडिया पर गर्भनिरोधक को लेकर भ्रामक जानकारी मिलती है, जैसे पिल्स से बांझपन होना। हालांकि 56% युवतियां डॉक्टर या विश्वसनीय वेबसाइट से जानकारी वेरिफाई भी करती हैं।

4. खरीदने में हिचक: 59% युवतियों ने बताया कि उन्हें मेडिकल स्टोर से गर्भनिरोधक खरीदने में हिचकिचाहट होती है, जिसमें 24% ने Privacy की कमी और 14% ने शर्मिंदगी को कारण बताया।

5. पॉजिटिव बात: 64% युवतियां जानती हैं कि कंडोम प्रेग्नेंसी के साथ-साथ HIV/STI से भी बचाता है। 64% ने कहा कि अगर गोपनीय और यूथ-फ्रेंडली स्वास्थ्य सेवाएं मिलें तो वे ज्यादा सहज होंगी।

स्कूल-कॉलेजों में नियमित काउंसलिंग की जरूरत पर जोर

प्रो. अंजू अग्रवाल ने बताया कि बुनियादी जागरूकता अच्छी है, लेकिन ECP रेगुलर गर्भनिरोधक नहीं है और STI से नहीं बचाता, यह स्पष्ट करना जरूरी है। प्रो. सुजाता देव ने स्कूल-कॉलेजों में नियमित काउंसलिंग की जरूरत पर जोर दिया।

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