UGC के नए नियमों के विरोध में 11 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन

दिल्ली के 70 विधानसभा में शुरू हुई पदयात्रा, हाथरस से शुरू हुआ विरोध अभियान दिल्ली तक पहुंचा, राष्ट्रीय परशुराम सेना ब्रह्म वाहिनी ने समर्थन का किया ऐलान

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नई दिल्ली।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी 2026 के नए विनियमों को लेकर विरोध का अभियान तेज होता जा रहा है। हाथरस के पंकज घबरैया द्वारा यूजीसी के नए नियमों के विरोध में पदयात्रा शुरू की गई है। ये यात्रा दिल्ली के कई विधानसभा में घूम चुकी है। आने वाले दिनों में ये दिल्ली के दूसरे सभी 70 विधानसभा में की जाएगी। साथ ही दिल्ली के जंतर-मंतर पर 11 अक्टूबर को धरना-प्रदर्शन भी किया जाएगा।

इस संबंध में राष्ट्रीय परशुराम सेना ब्रह्म वाहिनी के दिल्ली प्रभारी मुकेश शर्मा ने आंदोलन को समर्थन दिया है। वहीं आंदोलन से जुड़े लोगों के अनुसार, राष्ट्रीय परशुराम सेना ब्रह्म वाहिनी के कार्यकर्ता भी इसमें सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। संगठन की ओर से मुकेश कुमार प्रभारी, सचिव आचार्य मधुर और डॉ. सुनील कौशिक महाराज सहित अन्य पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने UGC के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।  संगठन ने समाज के लोगों से 11 अक्टूबर को जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शन में भाग लेने का आह्वान किया है।

क्या है यूजीसी का नया नियम

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम, 2026’ 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित किए थे। इनका घोषित उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में धर्म, जाति, लिंग, जन्मस्थान, दिव्यांगता आदि के आधार पर भेदभाव को रोकना और सभी विद्यार्थियों तथा अन्य हितधारकों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना था। नियमों में समानता केंद्र, शिकायतों की व्यवस्था और संस्थानों में भेदभाव से संबंधित मामलों पर कार्रवाई के प्रावधान किए गए थे।

हालांकि, इन नियमों को लेकर कुछ समूहों ने आपत्तियां उठाईं। विशेष रूप से सामान्य वर्ग और सवर्ण संगठनों से जुड़े प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नियमों में जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा और शिकायतों की व्यवस्था ऐसी है, जिससे सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों और शिक्षकों के खिलाफ शिकायतों के दुरुपयोग की आशंका पैदा हो सकती है। यह प्रदर्शनकारियों की आपत्ति और आशंका है, स्थापित तथ्य नहीं।

 

ब्राह्मण सहित अन्य सवर्ण वर्गों की क्या चिंता

आंदोलन से जुड़े संगठनों का मुख्य तर्क है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव रोकने की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो हर जाति के व्यक्ति को समान सुरक्षा और शिकायत का अधिकार दे। उनका कहना है कि यदि किसी प्रावधान की व्याख्या मुख्य रूप से आरक्षित वर्गों के संरक्षण तक सीमित रहती है, तो सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों या कर्मचारियों को शिकायत और कानूनी संरक्षण के स्तर पर असमानता महसूस हो सकती है।

संगठनों की दूसरी चिंता शिकायतों के संभावित दुरुपयोग को लेकर है। उनका कहना है कि जाति संबंधी विवाद में यदि शिकायत दर्ज होने मात्र से किसी विद्यार्थी, शिक्षक या कर्मचारी पर संस्थागत दबाव बनता है तो इससे सामान्य वर्ग के लोगों के लिए कठिनाई पैदा हो सकती है। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि शिकायतों की जांच निष्पक्ष, तथ्य आधारित और सभी वर्गों के लिए समान प्रक्रिया के तहत हो।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि यूजीसी के इन विनियमों का घोषित उद्देश्य किसी जाति या वर्ग को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा में भेदभाव रोकना और समानता सुनिश्चित करना है। यूजीसी के आधिकारिक नियमों में भी समान अवसर और भेदभाव समाप्त करने को उद्देश्य बताया गया है।

सर्वोच्च न्यायालय में मामला, फिलहाल लागू नहीं हैं नियम

यूजीसी के 2026 के इन विनियमों पर सर्वोच्च न्यायालय ने 29 जनवरी 2026 को रोक लगा दी थी। केंद्र सरकार ने फरवरी 2026 में लोकसभा में दिए जवाब में भी स्पष्ट किया था कि विनियम अधिसूचित होने के बाद सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के कारण इन्हें स्थगित रखा गया है और मामला न्यायालय में विचाराधीन है।

इसी मुद्दे को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए हैं। हाथरस में भी यूजीसी के नए नियमों के विरोध में प्रदर्शन और ज्ञापन दिए जाने की रिपोर्ट सामने आई है। फरवरी में राष्ट्रीय परशुराम सेना से जुड़े कार्यकर्ताओं ने पदयात्रा निकालने का प्रयास किया था और यूजीसी के नए नियम वापस लेने की मांग की थी।

11 अक्टूबर के प्रदर्शन को लेकर अपील

आंदोलन से जुड़े संगठनों का कहना है कि 11 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन के माध्यम से सरकार और संबंधित संस्थाओं के सामने सामान्य वर्ग की चिंताओं को रखा जाएगा। राष्ट्रीय परशुराम सेना ब्रह्म वाहिनी ने भी इसमें सहयोग और भागीदारी की बात कही है।

आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में यूजीसी के नए विनियमों की समीक्षा, शिकायत व्यवस्था में सभी वर्गों के लिए समान सुरक्षा, कथित दुरुपयोग की स्थिति में उचित जांच तथा उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित विवादों के समाधान के लिए स्पष्ट और निष्पक्ष व्यवस्था शामिल है।

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