नवरात्रि से दिवाली सीज़न की धमाकेदार शुरुआत
रिकॉर्ड ₹4.75 लाख करोड़ की बिक्री का अनुमान, स्वदेशी उत्पादों से सजेगा भारतीय बाजार
नई दिल्ली,
नवरात्रि के शुभारंभ के साथ ही देशभर में दिवाली सीज़न की रौनक दिखने लगी है। व्यापारी संगठनों का अनुमान है कि इस बार त्योहारी कारोबार ₹4.75 लाख करोड़ के ऐतिहासिक स्तर को छू सकता है। खास बात यह है कि इस वृद्धि का बड़ा हिस्सा भारतीय उत्पादों के कारण होगा, जिससे “वोकल फॉर लोकल” की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील को जबरदस्त समर्थन मिलता दिख रहा है।

पिछले चार वर्षों में दिवाली कारोबार लगातार बढ़ा है—2021 में ₹1.25 लाख करोड़, 2022 में ₹2.50 लाख करोड़, 2023 में ₹3.75 लाख करोड़ और 2024 में ₹4.25 लाख करोड़। इस बार अनुमानित ₹4.75 लाख करोड़ का आंकड़ा नया कीर्तिमान साबित होगा। अकेले दिल्ली में ही इस वर्ष बिक्री का अनुमान ₹75,000 करोड़ है।
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के राष्ट्रीय महामंत्री और चांदनी चौक से सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि कैट द्वारा किए गए सर्वे में दो प्रमुख कारक उभरे हैं—
- प्रधानमंत्री मोदी का “स्वदेशी – वोकल फॉर लोकल, लोकल फॉर ग्लोबल” का दृष्टिकोण, जिसे उपभोक्ताओं का व्यापक समर्थन मिल रहा है।
- हाल ही में लागू की गई व्यापक जीएसटी दर कटौती, जिसने व्यापारियों और उपभोक्ताओं को दिवाली से पहले बड़ा राहत पैकेज दिया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला उद्यमियों द्वारा बनाए गए भारतीय त्योहारी उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसने स्वदेशी वस्तुओं की गुणवत्ता और किफायती मूल्य का प्रमाण प्रस्तुत किया।
चीनी सामान बाहर, स्वदेशी का दबदबा
2020 की गलवान घटना के बाद से उपभोक्ताओं और व्यापारियों ने चीनी उत्पादों को लगातार नकारा है। इस बार दिवाली बाजारों से चीन निर्मित सामान लगभग पूरी तरह गायब हैं और आयातकों ने त्योहारों से जुड़े उत्पाद चीन से मंगाना बंद कर दिया है।
स्वदेशी खरीदारी की बढ़ती मांग
त्योहारी खरीदारी में उपभोक्ता खासतौर पर भारतीय मिट्टी के दीये, मूर्तियाँ, वॉल हैंगिंग्स, पूजा सामग्री, गृह सजावट, हैंडीक्राफ्ट, मिठाई, कपड़े, फर्नीचर, खिलौने, किचनवेयर और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं। हर सेक्टर में बंपर बिक्री की संभावना है, जिससे कारीगरों और निर्माताओं को सीधा लाभ होगा।
प्रवीन खंडेलवाल ने कहा, “दिवाली केवल रोशनी का त्योहार नहीं है, बल्कि यह आर्थिक प्रगति का पर्व भी है। भारतीय वस्तुओं पर खर्च किया गया हर रुपया रोजगार सृजन करेगा और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करेगा।”
त्योहारी कैलेंडर इस बार नवरात्रि से शुरू होकर अहोई अष्टमी, धनतेरस, दिवाली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज तक चलेगा तथा छठ पूजा व तुलसी विवाह तक विस्तार पाएगा। व्यापारी संगठनों ने इसे “अपनी दिवाली – भारतीय दिवाली” के रूप में मनाने का आह्वान किया है।
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