10 साल से माइग्रेन से परेशान मरीज की एंडोस्कोपिक सर्जरी, सिरदर्द की तीव्रता में 50% कमी
सर गंगाराम अस्पताल में उन्नत तकनीक से ऑपरेशन; हर महीने पड़ते थे 20-25 बार माइग्रेन के दौरे, दवाओं से नहीं मिल रही थी पर्याप्त राहत
नई दिल्ली।
करीब 10 वर्षों से गंभीर माइग्रेन और लगातार सिरदर्द की समस्या से जूझ रहे एक मरीज को सर गंगाराम अस्पताल में उन्नत एंडोस्कोपिक सर्जरी के बाद राहत मिली है। अस्पताल के वरिष्ठ प्लास्टिक सर्जन डॉ. स्वरूप सिंह गंभीर ने मरीज की एंडोस्कोपिक नर्व डीकंप्रेशन सर्जरी की। सर्जरी के बाद मरीज ने कनपटी के क्षेत्र में होने वाले सिरदर्द की तीव्रता और अवधि में करीब 50 फीसदी कमी बताई है। साथ ही, सिर के पिछले हिस्से में लगातार रहने वाले दर्द से भी राहत मिली है।
मरीज को हर महीने माइग्रेन के 20 से 25 दौरे पड़ते थे। इससे उसकी दिनचर्या और जीवन की गुणवत्ता बुरी तरह प्रभावित हो रही थी। कई वर्षों तक विभिन्न विशेषज्ञों से परामर्श लेने और अलग-अलग उपचार कराने के बावजूद उसे पर्याप्त राहत नहीं मिली। इसके बाद विस्तृत चिकित्सकीय जांच कर उपचार के दूसरे विकल्प पर विचार किया गया।
दर्द के ट्रिगर पॉइंट की पहचान के बाद सर्जरी
अस्पताल के अनुसार, सर्जरी से पहले मरीज की विस्तृत जांच की गई। इसमें कनपटी और सिर के पिछले हिस्से में दर्द से जुड़े ट्रिगर पॉइंट की पहचान और पुष्टि की गई। इसके बाद एंडोस्कोपिक तकनीक से संबंधित नसों पर दबाव कम करने के लिए सर्जरी की गई। इस प्रक्रिया में कैमरे से युक्त पतले उपकरण की मदद से छोटे चीरे के जरिए संबंधित हिस्से तक पहुंच बनाई जाती है।
सर्जरी के बाद शुरुआती आकलन में मरीज के लक्षणों में सुधार और दवाओं की जरूरत में कमी के संकेत मिले हैं। हालांकि, मरीज को अब भी सिर में भारीपन महसूस होता है। ऐसे में उपचार के दीर्घकालिक परिणामों का आकलन आगे की चिकित्सकीय निगरानी के आधार पर किया जाएगा।
चुनिंदा मरीजों में ही उपयोगी हो सकती है सर्जरी
माइग्रेन एक तंत्रिका संबंधी बीमारी है, जिसमें बार-बार तेज सिरदर्द हो सकता है। इसके साथ मतली, उल्टी और रोशनी व आवाज के प्रति संवेदनशीलता जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। गंभीर या बार-बार होने वाले दौरे व्यक्ति के कामकाज और सामाजिक जीवन को प्रभावित कर सकते हैं।
एंडोस्कोपिक माइग्रेन सर्जरी में उन चुनिंदा मरीजों के लिए विकल्प पर विचार किया जा सकता है, जिनके सिरदर्द का संबंध विशेष रूप से पहचाने गए परिधीय तंत्रिकाओं के ट्रिगर पॉइंट से हो। कुछ मामलों में आसपास की मांसपेशियों या संयोजी ऊतकों के कारण नसों पर दबाव पड़ सकता है या उनमें जलन हो सकती है, जो सिरदर्द में योगदान दे सकती है।
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