उत्तर रेलवे के GM ने की लखनऊ मंडल में चल रहे कार्यों की समीक्षा, निर्धारित समय में पूरा कराने के दिए निर्देश
लखनऊ मण्डल के DRM सुनील कुमार वर्मा तथा वाराणसी के वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
Lucknow: उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक अशोक कुमार वर्मा ने सोमवार को लखनऊ एवं वाराणसी में चल रहे प्रमुख निर्माण तथा अवसंरचना कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान लखनऊ मण्डल कार्यालय के सभागार में मण्डल के DRM सुनील कुमार वर्मा तथा वाराणसी के वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे।
समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण कार्य कराने पर विशेष जोर

लखनऊ मण्डल के सीनियर DCM कुलदीप तिवारी के मुताबिक इस मौके पर महाप्रबंधक ने विभिन्न परियोजनाओं के प्रगति की जानकारी ली। साथ ही समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण कार्य कराने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बाराबंकी–मल्हौर रेल खंड पर तृतीय एवं चतुर्थ लाइन निर्माण परियोजना की प्रगति पर विशेष रूप से चर्चा की। परियोजना के अंतर्गत बाराबंकी से मल्हौर के मध्य 27.0 किमी की तृतीय एवं चतुर्थ रेल लाइन का निर्माण कराया जा रहा है एवं मल्हौर- दिलकुशा के बीच 8.20 किमी की तृतीय लाइन का कार्य तथा दिलकुशा–लखनऊ खंड पर चार-लाइन की एंट्री–एग्जिट से संबंधित कार्य भी प्रगति पर हैं।
महाप्रबंधक को लखनऊ एवं वाराणसी क्षेत्र में चल रहे प्रमुख निर्माण कार्यों की भी दी गई जानकारी
महाप्रबंधक को लखनऊ एवं वाराणसी क्षेत्र में चल रहे अन्य प्रमुख निर्माण कार्यों की भी जानकारी दी गई। इनमें जौनपुर–जफराबाद रेल खंड में दोहरीकरण परियोजना के अंतर्गत, छोटे पुलों का विस्तार, प्लेटफार्म एवं भवन निर्माण कार्य तथा मेजर ब्रिज के सब-स्ट्रक्चर का निर्माण कार्य शामिल है। इसके साथ ही महाप्रबंधक वाराणसी–शिवपुर रेल खंड की तृतीय रेल लाइन के निर्माण कार्य की प्रगति से भी अवगत हुए तथा वाराणसी क्षेत्र में स्टेशन भवन एवं अन्य सहायक विविध निर्माण कार्यों के बारे मे भी जानकारी ली। परियोजनाओं की तकनीकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु विभिन्न ROB/RUB, मेजर एवं माइनर ब्रिज के लिए भू-तकनीकी जांच, संरचनात्मक ड्राइंग एवं डिजाइन समीक्षा का कार्य भी किया जा रहा है।
निर्धारित समय-सीमा में पूरे किए जाएँ सभी निर्माण कार्य
महाप्रबंधक ने निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूरे किए जाएँ तथा गुणवत्ता एवं संरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित हो। इन परियोजनाओं के पूरा होने से रेल खंडों की सेक्शनल क्षमता में वृद्धि होगी, परिचालन बाधाओं में कमी आएगी तथा संरक्षा, समयपालन एवं यात्री/माल परिवहन सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार होगा।
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