विवेकानंद अस्पताल के डॉक्टरों ने जटिल सर्जरी कर डेढ़ माह की बच्ची को दिया नया जीवन
इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ थे माता-पिता, अस्पताल में निःशुल्क हुई सर्जरी
Lucknow: IT चौराहा स्थित विवेकानंद अस्पताल के डॉक्टरों ने डेढ़ माह की नवजात बच्ची को नया जीवन दिया है। उत्तराखंड निवासी बच्ची के माता-पिता इलाज के लिए उसे यहां लाए थे। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. नीता भार्गव ने बताया कि बच्ची का जन्म से ही तालु कटा हुआ, स्वर ग्रंथि ढीली, सेप्सिस, किडनी काम नहीं कर रही थी और अस्पताल पहुंचने पर जीभ उल्टी फसी हुई थी।
ऑक्सीजन की कमी से बच्ची को आ रहे थे झटके

बच्ची का शरीर नीला पड़ गया था और ऑक्सीजन की कमी के चलते उसे झटके आ रहे थे। ऐसे में चुनौती इस बात की थी की बहुत सावधानी के साथ उसका इलाज किया जाना था, क्योंकि बच्ची के जीवन पर खतरा बना हुआ था।
डॉक्टरों ने चुनौती को स्वीकार करते हुए शुरू किया बच्ची का इलाज
विवेकानंद अस्पताल के डॉक्टरों ने इस चुनौती को स्वीकार किया और तुरंत ही प्लास्टिक सर्जन विभाग अध्यक्ष डॉ. अमित अग्रवाल, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. नीता भार्गव, ICU इंचार्ज डॉ. सचिन वर्मा की टीम ने बच्ची का इलाज शुरू कर दिया। सर्जरी कर जीभ को खींचकर सीधी करने के बाद बच्ची को एक हफ्ते के लिए वेंटिलेटर पर रखा गया, क्योंकि वह खुद से सांस नहीं ले पा रही थी।
बच्ची की हालत में सुधार, वजन भी बढ़ा, वार्ड में शिफ्ट
डॉ. नीता ने बताया कि लगभग 20 दिन के लिए ICU में रखने के बाद जब बच्ची की हालत में सुधार हुआ और उसका वजन भी बढ़ गया, तब शुक्रवार को उसे वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। बच्ची को फिलहाल ट्यूब से फीडिंग दी जा रही है। उन्होंने बताया कि जब बच्ची को इलाज के लिए लाया गया था तो उस वक्त ऑक्सीजन की कमी के चलते उसके ब्रेन पर भी असर हुआ था, इसलिए उसकी MRI जांच भी कराई गई थी। फिलहाल, बच्ची स्वस्थ है। 9 माह की आयु में तालू के ऑपरेशन के बाद वह एकदम स्वस्थ हो जाएगी।
देहरादून आश्रम के अध्यक्ष ने इलाज के लिए भेजा था विवेकानंद अस्पताल
विवेकानंद पॉलीक्लिनिक एवं आयुर्विज्ञान संस्थान के सचिव स्वामी मुक्तिनाथानंद ने बताया कि देहरादून स्थित रामकृष्ण मिशन आश्रम के अध्यक्ष ने इस नवजात बच्ची के कटे तालु के इलाज के लिए यहां भेजा था। क्योंकि माता-पिता इलाज का खर्चा उठाने में असमर्थ थे, और बच्ची की हालत गंभीर थी, इसलिए उसे यहां लाकर तुरंत ही उपचार शुरू कर दिया गया।
राजधानी के कार्पोरेट अस्पतालों में इस इलाज का 5 लाख आता है खर्च
भारत सरकार के प्रोजेक्ट स्माइल ट्रेन के अंतर्गत बच्ची की जटिल सर्जरी पूरी तरह से निशुल्क की गई। स्वामी जी ने कहा कि हमारे अस्पताल में इस जटिल सर्जरी की सामान्य रूप से लगभग 5 लाख का खर्चा आता है, जो की राजधानी के कॉर्पोरेट अस्पतालों में 5 से 10 गुना तक हो सकती है। विवेकानंद अस्पताल मरीज सेवा को नारायण सेवा के रूप में मानता है, इसलिए मरीज को न्यूनतम शुल्क पर प्रभावी इलाज दिया जाता है।
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