‘VB-G RAM G’ के विरोध में AIPF, ग्रामीण-गरीबों पर हमले के खिलाफ सड़कों पर उतरने का ऐलान!

देश के तमाम समूहों, संगठनों और दलों के साथ मिलकर ग्रामीण गरीबों पर किए इस हमले का चौतरफा विरोध करने का फैसला

4,869

New Delhi: AIPF ने मनरेगा (Manrega)
के बदले गए नए प्रस्तावित नाम ‘वीबी-जी राम जी’ (VB-G RAM G) पर विरोध जताया है। साथ ही देश के तमाम समूहों, संगठनों और दलों के साथ मिलकर ग्रामीण गरीबों पर किए इस हमले का चौतरफा विरोध करने का फैसला किया है। राष्ट्रीय कार्य समिति ने सरकार से तत्काल इस नई जन विरोधी रोजगार योजना को वापस लेने और मनरेगा को मजबूत करने का अनुरोध किया है।

AIPF की राष्ट्रीय कार्यसमिति ने बयान जारी कर जताया विरोध

New Delhi
New Delhi

राष्ट्रीय संगठन महासचिव कशु शुभमूर्ति ने इस सम्बंध में ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट (AIPF) की ओर से बयान जारी किया है।राष्ट्रीय कार्य समिति की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि मनरेगा की जगह मोदी सरकार द्वारा शुरू की जा रही विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) बिल, 2025 योजना गांव के गरीबों और मजदूरों को मिलने वाले रोजगार के कानूनी अधिकार को छीनने की कार्रवाई है।

मांगों को पूरा करने की बजाय BJP सरकार ने मनरेगा को ही खत्म कर दिया

AIPF ने जारी बयान में कहा कि देश में मनरेगा में साल भर काम की गारंटी देने, मजदूरी दर को बाजार भाव के अनुरूप करने और इसके बजट को बढ़ाने की मांग की गई थी। लेकिन इन मांगों को पूरा करने की बजाय भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने नाम बदलने के नाम पर मनरेगा को ही खत्म करने की कोशिश की है।

संविधान के प्रावधानों को खत्म करने की साजिश

राष्ट्रीय संगठन महासचिव कशु शुभमूर्ति ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी संविधान के नाम पर संविधान के अंदर मौजूद जन पक्षधर प्रावधानों और उनसे जुड़े बने कानूनों को खत्म करने और कमजोर करने में लगी हुई है। उन्होंने कहा कि देश में एक तानाशाही थोपने की उनकी मुहिम का परिणाम ग्रामीण रोजगार गारंटी के लिए चल रही मनरेगा योजना को खत्म करना भी है।
ऐसी स्थिति में AIPF देश के तमाम समूहों, संगठनों और दलों के साथ मिलकर ग्रामीण गरीबों पर किए इस हमले का चौतरफा विरोध करेगा।

गांव में पलायन व बेरोजगारी को बढ़ाने का काम करेगी नई योजना

ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट की राष्ट्रीय कार्य समिति की तरफ से कहा गया है कि मनरेगा की जगह लाई गई नई रोजगार योजना गांव में हो रहे पलायन व बेरोजगारी को बढ़ाने का काम करेगी। जिससे ग्रामीण गरीबों की क्रयशक्ति और कमजोर होगी। उन्हें आजीविका के संकट को भी झेलना पड़ेगा। यह देश में पहले से ही जारी मंदी को और भी बढ़ाने का काम करेगी।

सारे प्रावधान नई योजना से गायब

AIPF राष्ट्रीय कार्य समिति ने कहा है कि मनरेगा में जहां सभी ग्रामीण गरीबों को जॉब कार्ड मिलता था, यहां तक कि सरकार की यह जवाबदेही थी कि काम मांगने के 14 दिनों के अंदर सरकार मजदूरों को काम देना सुनिश्चित करे और काम ना दे पाने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता दे। साथ ही यदि मजदूरी बकाया रह जाती है तो ब्याज सहित उसका भुगतान करे। यह सारे प्रावधान नई योजना में नहीं हैं।

पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहे राज्यों के लिए दे पाना मुश्किल!

बयान में कहा गया है कि मनरेगा में जहां केंद्र सरकार 90% धनराशि देती थी और 10% ही राज्य सरकार को देना पड़ता था। वहीं इस कानून में 60% केंद्र और 40% राज्य द्वारा देने की जो बात कही गई है, वह पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहे राज्यों के लिए दे पाना मुश्किल होगा।

60 दिन कृषि कार्य देने के प्रावधान पर रोक

इस योजना के अनुसार मनरेगा के तहत वर्ष के 60 दिन कृषि कार्य देने के प्रावधान पर रोक लगा दी गई है। सभी लोग जानते हैं कि कृषि कार्य के मशीनीकरण के कारण पहले ही खेत मजदूरों को कृषि में काम नहीं मिल रहा था और उन्हें बड़ी संख्या में पलायन करना पड़ता है। ऐसे में यह कार्यवाही मजदूरों पर एक बड़ा कुठाराघात है। मनरेगा में जहां जॉब कार्ड, मस्टर रोल, सोशल ऑडिट, सब लिखित और सार्वजनिक है, वहीं इस योजना में ऐसा कुछ भी नहीं है।

पहले से ही पूंजीपति मनरेगा का करते आये हैं विरोध

बयान में कहा गया है कि मनरेगा योजना लागू होने के समय से ही देश के बड़े पूंजी घराने इसका विरोध करते रहें है। सत्ता प्राप्त करने के बाद से ही मोदी सरकार मनरेगा के प्रति कभी भी सहज नहीं रही है। कोविड काल, जिसमें मनरेगा ने लोगों को भुखमरी की हालत से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी, उस अवधि को छोड़ दिया जाए तो सरकार मनरेगा के बजट फंड में लगातर कटौती करती रही है। अब उसने इसे सीधे तौर पर बंद करने का निर्णय लिया है।

सरकार से तत्काल निर्णय को वापस लेने की मांग

कार्यसमिति की ओर से कहा गया है कि सरकार को चाहिए कि वह तत्काल इस नई जन विरोधी रोजगार योजना को वापस ले और मनरेगा को मजबूत करने का काम करे।

Comments are closed.