UGC के फैसलों से उच्च शिक्षा में सामाजिक न्याय पर संकट!

राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की माँग, छात्रों-शिक्षकों में उबाल

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Lucknow: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा मौजूदा समय में लिए जा रहे निर्णयों को लेकर देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में गंभीर असंतोष और चिंता का माहौल बन गया है। इन निर्णयों पर सामाजिक न्याय, आरक्षण और समान अवसर की संवैधानिक व्यवस्था को कमजोर करने के आरोप लग रहे हैं।

UGC के निर्णयों पर तत्काल रोक लगाने और संवैधानिक समीक्षा की माँग

इसी मुद्दे को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता आशीष कुमार तिवारी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर UGC के निर्णयों पर तत्काल रोक लगाने और संवैधानिक समीक्षा की माँग की है। उन्होंने कहा कि यह केवल नीतिगत बदलाव का मामला नहीं, बल्कि संविधान की मूल भावना से जुड़ा प्रश्न है। पत्र में कहा गया है कि UGC के कुछ प्रावधान उच्च शिक्षा को धीरे-धीरे कुछ विशेष वर्गों तक सीमित करने की दिशा में ले जाते प्रतीत हो रहे हैं। इससे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और वंचित तबकों की भागीदारी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जो समानता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।

समय रहते इन निर्णयों पर पुनर्समीक्षा करने का अनुरोध

आशीष कुमार तिवारी ने तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि जब संविधान समान अवसर की गारंटी देता है, तब किसी आयोग को यह अधिकार कैसे मिल सकता है कि वह वर्षों के सामाजिक संघर्ष से अर्जित अधिकारों को कमजोर करे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन निर्णयों की समय रहते पुनर्समीक्षा नहीं हुई, तो इसका दुष्परिणाम केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सामाजिक संतुलन और लोकतांत्रिक विश्वास पर भी असर पड़ेगा।

न्यायपूर्ण संवैधानिक हस्तक्षेप की आवश्यकता

उन्होंने कहा, “देश को इस समय मौन नहीं, बल्कि न्यायपूर्ण संवैधानिक हस्तक्षेप की आवश्यकता है। उच्च शिक्षा किसी भी वर्ग के लिए बंद दरवाज़ा नहीं बननी चाहिए।” इस मुद्दे को लेकर देशभर में छात्रों और शिक्षकों के बीच असंतोष बढ़ता जा रहा है। कई शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों ने भी UGC के निर्णयों की समीक्षा की माँग उठाई है। अब निगाहें राष्ट्रपति भवन पर टिकी हैं कि इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या कदम उठाया जाता है।

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