‘संविधान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं, इसी से चलेगा देश’, आशीष तिवारी का UGC को कड़ा संदेश
अनुच्छेद 14 और 16 समानता और समान अवसर की गारंटी
Lucknow: UGC Draft Regulations 2026 पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सामाजिक कार्यकर्ता आशीष तिवारी ने साफ़ शब्दों में कहा है कि University Grants Commission को यह भ्रम छोड़ देना चाहिए कि वह संविधान से ऊपर है। अनुच्छेद 14 और 16 समानता और समान अवसर की गारंटी हैं—इनके नाम पर ऐसी नीतियाँ थोपना, जिनका परिणाम किसी वर्ग के लिए वर्षों तक अवसरों का शून्य हो जाना हो, संवैधानिक सुधार नहीं बल्कि संवैधानिक अपराध है। यह समानता नहीं, संस्थागत बहिष्करण है।
नारे नहीं, उसके नतीजे होते हैं नीति की कसौटी
आशीष तिवारी ने कहा कि आरक्षण का उद्देश्य संतुलन है, न कि किसी भी वर्ग को व्यावहारिक रूप से गायब कर देना। नीति की कसौटी उसके नारे नहीं, उसके नतीजे होते हैं। जब नीति का तरीका ही ऐसा हो कि योग्य और पात्र नागरिकों के लिए दरवाज़े बंद हों, तो वह सामाजिक न्याय नहीं, नई और खतरनाक असमानता पैदा करती है। काग़ज़ी समावेशन से संविधान संतुष्ट नहीं होता—वास्तविक, जीवित और बराबर अवसर ही संविधान की मांग है।
आंबेडकर का संविधान किसी प्रयोग का मैदान नहीं
उन्होंने दो टूक कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर का संविधान किसी प्रयोग का मैदान नहीं है। बाबा साहेब ने आरक्षण को उपाय माना था, किसी को स्थायी रूप से वंचित करने का हथियार नहीं। जो नीतियाँ इस मूल भावना को रौंदती हैं, वे संविधान की रक्षा नहीं करतीं-वे उसे खोखला करती हैं।
संविधान से ऊपर कोई नहीं
आशीष तिवारी ने चेतावनी देते हुए कहा कि संविधान से ऊपर कोई नहीं-न कोई संस्था, न कोई नीति। यदि UGC संवैधानिक सीमाएँ लांघेगा, तो उसे कानूनी, लोकतांत्रिक और नैतिक मोर्चे पर निर्णायक प्रतिरोध का सामना करना पड़ेगा। यह देश किसी एजेंडे से नहीं, संविधान से चलेगा और संविधान के विरुद्ध कुछ भी न स्वीकार होगा, न चलने दिया जाएगा।
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