स्वामी ब्रह्मविहारदास और स्वामी रामदेव ने जगाई वैदिक मूल्यों की प्रेरणा

आर्य समाज की 150वीं वर्षगांठ पर वैश्विक महोत्सव का हुआ समापन

140

नई दिल्ली, 2 नवम्बर

आर्य समाज की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय समारोह में बीएपीएस स्वामी ब्रह्मविहारदास और योग गुरु स्वामी रामदेव ने अपने प्रेरक उद्बोधनों से विश्वभर से आए प्रतिनिधियों को वैदिक आदर्शों — सत्य, एकता और करुणा — को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।

40 देशों से प्रतिनिधियों की उपस्थिति

कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक स्तोत्रों के साथ हुई, जिसमें स्वामी ब्रह्मविहारदास ने अपने गुरुजनों — स्वामी महाराज और गुरु हरि मोहन स्वामी महाराज — का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आर्य समाज का यह उत्सव केवल 150 वर्षों की परंपरा का उत्सव नहीं, बल्कि मानवता, धर्म और नैतिकता के अमर मूल्यों को अपनाने का आह्वान है।
उन्होंने अबू धाबी मंदिर के निर्माण का उदाहरण देते हुए कहा कि “विश्वास और दृढ़ता से असंभव भी संभव हो जाता है।”

‘ऋषि परंपरा और स्वर्णिम भारत’ पर मंथन

‘ऋषि परंपरा और स्वर्णिम भारत का निर्माण’ विषय पर आयोजित विशेष सम्मेलन में भारत की नैतिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण यात्रा पर चर्चा हुई।
अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका से आए अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने बताया कि आज 15,000 से अधिक आर्य समाज संस्थाएं विश्वभर में महर्षि दयानंद सरस्वती के सत्य, शिक्षा और समानता के संदेश को आगे बढ़ा रही हैं।

एक वक्ता ने कहा, “जब दुनिया विभाजन और मोहभंग के दोराहे पर खड़ी है, तब आर्य समाज वैदिक ज्ञान का प्रकाशस्तंभ बनकर मानवता को दिशा दे रहा है।”

स्वामी रामदेव जी ने याद दिलाया दयानंद जी का योगदान

स्वामी रामदेव जी ने अपने उद्बोधन में महर्षि दयानंद सरस्वती को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वे केवल एक योगी नहीं बल्कि ऐसे दूरद्रष्टा थे जिन्होंने भारत में वैदिक ज्ञान और राष्ट्रीय चेतना का पुनर्जागरण किया।
उन्होंने कहा कि आर्य समाज ने महिलाओं की शिक्षा, गुरुकुल व्यवस्था और सामाजिक सुधार में अग्रणी भूमिका निभाई। “आर्य समाज कभी कट्टर नहीं रहा, यह ज्ञान, शक्ति और राष्ट्रसेवा का जीवंत आंदोलन है,” उन्होंने कहा।

स्वामी रामदेव जी ने आर्य समाज को भारत की स्वतंत्रता संग्राम की आध्यात्मिक रीढ़ बताते हुए कहा कि सच्ची स्वतंत्रता केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि शैक्षिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक स्वाधीनता में निहित है।

नशा-मुक्ति पर छात्रों का मंचन

कार्यक्रम में गुरुकुल के छात्रों ने नशा मुक्ति और सामाजिक बुराइयों से युवाओं की रक्षा पर आधारित एक भावनात्मक नाट्य प्रस्तुति दी।

तीसरे दिन का यह अंतरराष्ट्रीय आर्य महा सम्मेलन सत्य, समानता और वैदिक प्रकाश से संचालित विश्व निर्माण के संकल्प के साथ संपन्न हुआ।
इस अवसर पर राष्ट्र के सामने उपस्थित चुनौतियों और उनमें आर्य समाज की भूमिका पर भी विचार-विमर्श हुआ।

अब तक दो लाख से अधिक लोग इस भव्य आयोजन में शामिल हो चुके हैं। समारोह का आज समापन है।

Comments are closed.