राष्ट्रीय फार्मेसी शिक्षा दिवस पर याद किए गए प्रो. एम.एल. श्रॉफ, योगदान पर हुई चर्चा
डिपार्टमेंट ऑफ फार्मेसी एवं स्कूल ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज ने संयुक्त रूप से किया था आयोजन
Lucknow: इंटीग्रल यूनिवर्सिटी में शुक्रवार को
राष्ट्रीय फार्मेसी शिक्षा दिवस 2026 (फार्मा अन्वेषण) का आयोजन किया गया। संयुक्त रूप से डिपार्टमेंट ऑफ फार्मेसी एवं स्कूल ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज द्वारा इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य भारत में फार्मेसी शिक्षा के जनक प्रो. एम.एल. श्रॉफ के योगदान को स्मरण करना तथा स्वास्थ्य सेवाओं और अनुसंधान में फार्मासिस्ट की बदलती भूमिका के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
समन्वय की आवश्यकता पर जोर
इस वर्ष कार्यक्रम की थीम “Future Pharma Ecosystem: Fostering Synergy among Academia, Industry, Research, Regulatory and Practice” रखी गई। कार्यक्रम में वक्ताओं ने फार्मा क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए अकादमिक, उद्योग, अनुसंधान, नियामक और व्यावहारिक क्षेत्रों के बीच समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत फैकल्टी ऑफ फार्मेसी के डीन प्रो. (डॉ.) सैयद मिस्बाहुल हसन के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने मुख्य अतिथियों, संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए प्रो. एम. एल. श्रॉफ के योगदान तथा भारत में फार्मेसी शिक्षा के विकास पर विचार साझा किए।
प्रो. श्रॉफ की महत्वपूर्ण भूमिका व योगदान पर विस्तार से चर्चा
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता आईएचपीए के राष्ट्रीय अध्यक्ष आर. ए. गुप्ता तथा स्टेट फार्मेसी काउंसिल के पूर्व चेयरमैन सुनील कुमार यादव उपस्थित रहे। दोनों वक्ताओं ने अपने संबोधन में प्रो. एम. एल. श्रॉफ की महत्वपूर्ण भूमिका और भारत में फार्मेसी शिक्षा के विकास में उनके योगदान पर विस्तार से चर्चा की।
अपने संबोधन में आर. ए. गुप्ता ने दवाओं के सुरक्षित निस्तारण (डिस्पोज़ल), सरकारी संस्थानों में फार्मासिस्ट के रिक्त पदों तथा विद्यार्थियों को नेशनल फार्मुलरी ऑफ इंडिया और इंडियन फार्माकोपिया का अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया।
सुनील यादव ने भारत और विदेशों में फार्मासिस्ट की बढ़ती भूमिका को किया रेखांकित
वहीं सुनील कुमार यादव ने भारत और विदेशों में फार्मासिस्ट की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया। साथ ही सुरक्षित एवं प्रभावी दवा उपयोग में उनकी महत्ता भी बताई। उन्होंने यह भी कहा कि “दवा अपनी निर्धारित समाप्ति तिथि से पहले भी एक्सपायर हो सकती है”, और ऐसी परिस्थितियों को सही ढंग से समझना और प्रबंधित करना केवल एक योग्य फार्मासिस्ट ही कर सकता है।
कार्यक्रम के आयोजन में सह-संयोजक प्रो. तारिक महमूद, प्रो. कुलदीप सिंह तथा डॉ. इरफान अज़ीज़, प्रिंसिपल, स्कूल ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम के अंत में डिपार्टमेंट ऑफ फार्मेसी के विभागाध्यक्ष प्रो. जुबेर अख्तर ने सभी के प्रति आभार जताया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।
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