Mock Drill: लखनऊ में चण्डीगढ़-वाराणसी स्पेशल ट्रेन के तीन कोचों में लगी भीषण आग!
यह कोई हादसा या दुर्घटना नहीं बल्कि मॉकड्रिल था
Lucknow: लखनऊ में दुर्घटना के बाद चण्डीगढ़-वाराणसी स्पेशल ट्रेन के तीन कोचों में अचानक भीषण आग लग गई। मौके पर तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरु किया गया। आग से झुलसे यात्रियों की एक सूची तैयार की गई। राहत ट्रेन तथा मेडिकल यान भी पहुंची।
आपातकालीन स्थितियों में तत्काल तैयारी और प्रशिक्षण की समीक्षा

दरअसल, यह कोई हादसा या दुर्घटना नहीं बल्कि मॉकड्रिल था, जो आपातकालीन स्थितियों में तत्काल और प्रभावी प्रतिक्रिया के लिए तैयारी और प्रशिक्षण की समीक्षा के लिए आयोजित किया गया था। इस पूरी कार्यवाही के दौरान आग पर काबू पाने से लेकर यात्रियों का रेसक्यू करने तक सम्पूर्ण कार्यवाही को दर्शाया गया। आलमबाग थाने के पीछे) स्थित लखनऊ यार्ड की POH साइडिंग में शुक्रवार को इस मॉकड्रिल को अंजाम दिया गया।
मौके पर मौजूद रहे DRM समेत रेल के अफसर

मौके पर लखनऊ मंडल के DRM सुनील कुमार वर्मा भी मौजूद रहे। मण्डल के संरक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी समर्थ गुप्ता के संयोजन में डिवीजनल ऑपरेशनल ट्रेनिंग सेंटर/सेफ्टी कैंप के पास इसका आयोजन हुआ। सीनियर DCM कुलदीप तिवारी के मुताबिक, इस दौरान राहत एवं बचाव कार्यों के साथ-साथ आपदा प्रबंधन की कार्यविधि का परीक्षण किया गया। यह मॉकड्रिल आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित और उचित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
मॉकड्रिल में ये विभाग हुए शामिल

मॉकड्रिल में नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF), स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (SDRF), फायर ब्रिगेड विभाग, स्थानीय पुलिस, रेड क्रॉस सोसायिटी, रेलवे का चिकित्सा विभाग, स्काउट एवं गाइड, रेल सुरक्षा बल, वाणिज्य विभाग, परिचालन विभाग रेलवे तथा जिला प्रशासन के सिविल डिफेन्स ने सामूहिक रूप से साझा तालमेल के साथ इस पूरी गतिविधि को सफलतापूर्वक सम्पन्न किया।
रेलकर्मियों को सजग व किया जाता है जागरूक

DRM सुनील कुमार वर्मा ने अवगत कराया कि रेलवे तथा राज्य प्रशासन के आपसी सहयोग और तालमेल के साथ इस पूरे घटनाक्रम को अत्यंत कुशलतापूर्वक सम्पन्न किया गया। उन्होंने बताया कि इस प्रकार की गतिविधि द्वारा रेलकर्मियों को रेलवे में होने वाली किसी भी प्रकार की दुर्घटना के प्रति सजग एवं जागरूक करते हुए त्वरित राहत एवं बचाव कार्य करने तथा आपदा प्रबंधन के लिए उठाए जाने वाले कदम उठाने के लिए किया जाता है। DRM ने आगे बताया कि ऐसे कार्यकलापों से रेलकर्मी मानसिक एवं शारीरिक रूप से इस प्रकार की स्थितियां उत्पन्न होने पर पूरे मनोयोग से कार्य करने में सक्षम होते हैं।
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