MARD और FAIMA ने की सांसद सुप्रिया सुले से मुलाकात, जानें क्या है पूरा मामला

महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल द्वारा बीएचएमएस डॉक्टरों को पंजीकरण देने पर जताई कड़ी आपत्ति

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नई दिल्ली/मुंबई
महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेज़िडेंट डॉक्टर्स (MARD) और फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने लोकसभा सांसद सुप्रिया ताई सुले से मुलाकात कर महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (MMC) के हालिया निर्णय पर गंभीर चिंता जताई है। यह निर्णय बीएचएमएस (BHMS) डॉक्टरों को एक साल का सीसीएमपी (CCMP – Certificate Course in Modern Pharmacology) ब्रिज कोर्स करने के बाद पंजीकरण देने से संबंधित है।
बैठक के दौरान संगठनों ने कई सवाल उठाए और उन्हें दूर करवाने में मदद की गुहार लगाई। संगठन ने सवाल उठाया कि इस फैसले से मरीज के स्वास्थ्य पर खतरा हो सकता है। साथ ही स्तर में गिरावट हो सकती है।
मूल उद्देश्य से विचलन : सीसीएमपी कोर्स की शुरुआत केवल ज्ञान वृद्धि के लिए की गई थी। कोर्स शुरू करते समय यह कहीं तय नहीं था कि इस कोर्स को पूरा करने वालों को महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल में डॉक्टर के रूप में पंजीकरण मिलेगा।
मरीजों की सुरक्षा पर खतरा : सिर्फ एक साल के ब्रिज कोर्स के आधार पर ऐसे डॉक्टरों को पंजीकरण देना बेहद खतरनाक है। इन उम्मीदवारों को बीमारी की सही पहचान, आपात स्थिति प्रबंधन और जटिलताओं को संभालने का पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं मिला होता। इसका सीधा असर मरीजों की जान पर पड़ सकता है।
मेडिकल शिक्षा के स्तर में गिरावट : जहां एक ओर आधुनिक मेडिकल शिक्षा में डॉक्टरों को पाँच साल का एमबीबीएस कोर्स और उसके बाद तीन साल की कठोर रेज़िडेंसी ट्रेनिंग दी जाती है, वहीं एक साल के शॉर्ट कोर्स को उसके बराबर मान लेना चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को कमजोर करता है।
कानूनी और संवैधानिक उल्लंघन : एमएआरडी और फेमा ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) की गाइडलाइंस के खिलाफ है और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा क्रॉस-पैथी पर दिए गए स्पष्ट निर्देशों का उल्लंघन भी है।
संगठनों ने सुप्रिया सुले से मांग की कि इस मामले को तुरंत संसद और संबंधित मंत्रालयों के सामने उठाया जाए, ताकि महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल के इस फैसले को वापस लिया जा सके और चिकित्सा शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता से कोई समझौता न हो।

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