तेजी से बढ़ रही Hypertrophic Cardiomyopathy, 90% मरीज अनजान

BEAT 2025: Cardiovascular Summit & Awards में देशभर के प्रमुख हृदय विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और मरीज प्रतिनिधियों ने चेताया कि यह बीमारी जितनी “दुर्लभ” मानी जाती है, वास्तव में उससे कहीं अधिक आम है

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नई दिल्ली।

भारत में हृदय रोगों के बढ़ते खतरे के बीच अब विशेषज्ञों ने एक नई और खतरनाक हकीकत पर रोशनी डाली है — हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी (HCM), यानी हृदय की मांसपेशियों का असामान्य मोटा होना, जो लाखों भारतीयों को प्रभावित कर रहा है लेकिन ज्यादातर को इसका पता तक नहीं है।

BEAT 2025: Cardiovascular Summit & Awards में देशभर के प्रमुख हृदय विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और मरीज प्रतिनिधियों ने चेताया कि यह बीमारी जितनी “दुर्लभ” मानी जाती है, वास्तव में उससे कहीं अधिक आम है — हर 200 में से एक भारतीय इससे ग्रसित हो सकता है, लेकिन 80 से 90 प्रतिशत मरीज बिना निदान के जी रहे हैं।

इस सत्र का आयोजन Voice of Healthcare (VOH) ने Bristol Myers Squibb (BMS) के सहयोग से किया। चर्चा का नेतृत्व डॉ. के. मदन गोपाल, सलाहकार (NHSRC) ने किया। पैनल में डॉ. उपेंद्र कौल (बत्रा हॉस्पिटल), डॉ. अनिल सक्सेना (फोर्टिस एस्कॉर्ट्स), प्रो. एन. एन. खन्ना (अपोलो हॉस्पिटल) और मरीज अधिवक्ता राम खंडेलवाल शामिल थे।

“अगर संदेह नहीं करेंगे तो बीमारी दिखेगी नहीं”

डॉ. मदन गोपाल ने कहा कि भारत में सबसे बड़ी समस्या जागरूकता और शुरुआती पहचान की कमी है। “अधिकतर मामले 40 की उम्र के बाद पकड़ में आते हैं। अगर चिकित्सक या परिवार को शक नहीं होगा, तो बीमारी छिपी ही रह जाएगी,” उन्होंने कहा।

“हर 200 में एक, पर 90% को पता नहीं”

डॉ. उपेंद्र कौल ने बताया, “यह दुनिया की सबसे आम आनुवंशिक हृदय बीमारियों में से एक है। लेकिन भारत में 80–90% मरीज बिना निदान के रहते हैं। नियमित ECHO और जेनेटिक टेस्टिंग से हम कई जानें बचा सकते हैं।”

“थकान या मोटापा नहीं, ये दिल की चेतावनी हो सकती है”

डॉ. अनिल सक्सेना ने कहा, “अक्सर मरीजों के हल्के लक्षणों को तनाव या मोटापे से जोड़ दिया जाता है, जबकि यही हृदय की बीमारी के संकेत हो सकते हैं। देशभर में जांच की गुणवत्ता में असमानता भी बड़ी चुनौती है।”

“केंद्रित उत्कृष्टता केंद्र बनाने की जरूरत”

प्रो. एन. एन. खन्ना ने HCM सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने और हब-एंड-स्पोक मॉडल के जरिए इलाज को सुलभ बनाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा, “यह बहु-विषयक दृष्टिकोण मांगता है — कार्डियोलॉजिस्ट, जेनेटिसिस्ट, और इमेजिंग विशेषज्ञों का समन्वय अनिवार्य है।”

“कहानी साझा करना भी इलाज का हिस्सा”

हार्ट हेल्थ इंडिया फाउंडेशन के संस्थापक राम खंडेलवाल ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, “मेरे लक्षणों को साधारण थकान कहा गया, पर असल में यह HCM थी। दुनिया में केवल 5% मामलों का ही निदान हो पाता है। मरीजों की कहानियां साझा करना जागरूकता बढ़ाने का सशक्त माध्यम हो सकता है।”

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