पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद शाहजहाँपुर आश्रम में श्री राम चंद्र मिशन के स्वर्ण जयंती समारोह में होंगे शामिल

20 दिन के इस उत्सव को सभी धर्मों का माना जा रहा है ‘महाकुंभ’

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Lucknow: भारत के पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद कल शाहजहाँपुर में हो रहे श्री राम चंद्र मिशन आश्रम के स्वर्ण जयंती समारोह में शामिल होंगे। आश्रम में 12 फरवरी से 2 मार्च के बीच एक विशाल स्वर्ण जयंती समारोह का आयोजन किया जा रहा है, जिसे आयोजनकर्ता और अनुयायी सभी धर्मों का ‘महाकुंभ’ मान रहे हैं।

सामूहिक ध्यान, मनन-चर्चा और सेवा होगी

बीस दिन के इस आध्यात्मिक कार्यक्रम में सामूहिक ध्यान, मनन-चर्चा और सेवा होगी। इस समारोह में सामूहिक ध्यान का नेतृत्व हार्टफुलनेस के मार्गदर्शक और श्री राम चंद्र मिशन के अध्यक्ष दाजी करेंगे। स्वर्ण जयंती समारोह के महत्व पर बोलते हुए हार्टफुलनेस के मार्गदर्शक और श्री राम चंद्र मिशन के अध्यक्ष दाजी ने कहा, “शाहजहाँपुर आश्रम के पचास साल पूरे होना हमारे पिछले मार्गदर्शकों के निरंतर आध्यात्मिक कार्य का प्रतीक है।

सामूहिक विकास के लिए दुनिया भर से लोगों को आकर्षित करने का केंद्र

शाहजहाँपुर आश्रम आध्यात्मिकता की लहरें प्रसारित करने और चेतना के सामूहिक विकास के लिए दुनिया भर से लोगों को आकर्षित करने का केंद्र रहा है। यह जगह मननशील जीवनचर्या, ध्यान सत्रों और सकारात्मक ऊर्जा के केंद्र के तौर पर काम करती रही है।” स्वर्ण जयंती समारोह पाँच भागों में आयोजित किया जा रहा है– पहला 12-14 फरवरी के बीच, दूसरा 16-18 फरवरी के बीच, उसके बाद 20-22 फरवरी, 24-26 फरवरी के बीच और आखिरी 28 फरवरी से 2 मार्च के बीच।

कई अन्य देशों से हज़ारों भक्तों के आने की उम्मीद

पूरे भारत और कई अन्य देशों से हज़ारों भक्तों के आने की उम्मीद है जो मिशन की लगातार वैश्विक मौजूदगी और राज योग करने वालों के बीच इसके हमेशा बने रहने वाले आकर्षण को दिखाता है। समारोह में भाग लेने वाले सभी लोगों के लिए भोजन और आवास की व्यवस्था की गई है। पहुँचने की सुविधा के लिए लखनऊ और नई दिल्ली के एयरपोर्ट, लखनऊ के रेलवे स्टेशन और लखनऊ और शाहजहाँपुर के बस स्टेशनों पर स्वयंसेवक तैनात किए गए हैं

सभी धर्मों को  एक साथ लाया

यह आश्रम आंतरिक अनुशासन, सामूहिक चेतना और आध्यात्मिक सुधार के लिए प्रेरित करता है। एक आधुनिक ध्यान केंद्र और ‘सहज मार्ग’ के वैश्विक केंद्र के तौर पर बना यह आश्रम पाँच दशकों के अपने सफ़र में 164 देशों के सभी धर्मों के लोगों को एक साथ लाया है। इस आश्रम को इसके संस्थापक रामचंद्र महाराज ने 1976 की बसंत पंचमी पर अपने गुरु समर्थ महात्मा श्री रामचंद्र जी महाराज की याद में समर्पित किया था।

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