BJP सरकार से किसान परेशान, जानें AAP ने क्यों लगाया आरोप
दुर्गेश पाठक ने कहा, गुजरात में किसान दमन, उपेक्षा और आर्थिक संकट से जूझ रहे
नई दिल्ली/गुजरात, 19 नवंबर 2025।
गुजरात में किसानों की लगातार हो रही आत्महत्याओं पर आम आदमी पार्टी ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी के गुजरात सह-प्रभारी दुर्गेश पाठक ने कहा कि राज्य में किसान दमन, उपेक्षा और आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं, और इसी मजबूरी में 25 दिनों के भीतर 6 किसान आत्महत्या कर चुके हैं। उनका कहना है कि यह स्थिति बताती है कि भाजपा सरकार में किसानों की हालत बेहद खराब है।
दुर्गेश पाठक ने आरोप लगाया कि सरकार उद्योगपतियों के करोड़ों के लोन माफ कर रही है, लेकिन किसानों के छोटे कर्ज माफ करने को तैयार नहीं। उन्होंने मांग की कि गुजरात सरकार पंजाब मॉडल अपनाते हुए बर्बाद फसलों पर प्रति हेक्टेयर 50 हजार रुपये का मुआवजा दे। पाठक के अनुसार बेमौसम बारिश, महंगी खेती लागत, बैंक लोन न मिलना और बिचौलियों द्वारा शोषण किसानों को कर्जजाल में धकेल रहा है।
उन्होंने बताया कि करदा प्रथा के खिलाफ चल रहे आंदोलन में आम आदमी पार्टी के 67 नेता और किसान एक महीने से ज्यादा समय से जेल में बंद हैं। किसानों का आरोप है कि व्यापारी पहले ऊंचे रेट पर कुछ माल खरीदते हैं और बाद में रेट घटाकर बकाया माल उसी कीमत पर लेने का दबाव बनाते हैं। पाठक ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की तानाशाही इस शोषण को खत्म करने की बजाय आंदोलनकारियों को जेल भेज रही है।
दुर्गेश पाठक के अनुसार गुजरात भर में किसान महापंचायतें हो रही हैं और किसान अपनी समस्याओं से बेहद परेशान हैं। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र और गुजरात सरकार ने किसानों की मदद नहीं की तो किसान एकजुट होकर इसका जवाब देंगे।
प्रेसवार्ता में पार्टी की मुख्य प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने भी केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने अमेरिकी कपास पर इंपोर्ट ड्यूटी हटाकर लाखों भारतीय किसानों को बर्बाद कर दिया। किसान जहां एमएसपी में बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे थे, वहीं बाजार में अमेरिकी कपास के सस्ते होने से उन्हें बेहद कम कीमतें मिल रही हैं।
प्रियंका कक्कड़ ने पंजाब सरकार के तेजी से दिए गए 50 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजे का उदाहरण देते हुए कहा कि गुजरात सरकार भी ऐसा कर सकती है, लेकिन किसानों की मदद करने की नीयत नहीं है। उन्होंने कहा कि केंद्र ने पंजाब के लिए घोषित 1600 करोड़ रुपये की राहत भी अब तक जारी नहीं की, जो भाजपा की संवेदनहीनता को दिखाता है।
दोनों नेताओं ने कहा कि किसान लगातार संकट में हैं और भाजपा सरकार सिर्फ हेडलाइन मैनेजमेंट में लगी है। यदि सरकार ने तुरंत कदम नहीं उठाए तो हालात और खराब होंगे।
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