देश की पहली डोर-टू-डोर लॉजिस्टिक्स सेवा का शुभारंभ, अब घर बैठे भेजिए रेलवे से पार्सल

अब एक फोन पर पार्सल लेने के लिए आपके यहां पहुंच जाएंगे रेल कर्मी

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Lucknow, Mukesh Kumar: रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से लखनऊ मंडल के सोनिक गुड्स शेड पर देश की पहली डोर-टू-डोर लॉजिस्टिक्स सेवा का शुभारंभ किया। कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (कॉन्कोर) इसका संचालन करेगा।

अब व्यापारियों या आम ग्राहकों को नहीं जाना होगा स्टेशन

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रेलवे से पार्सल भेजने के लिए अब व्यापारियों या आम ग्राहकों को इसके लिए स्टेशन जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अब आपके एक फोन पर पार्सल लेने के लिए रेलवे कर्मी आपके यहां पहुंच जाएंगे।

यह रेलवे का महत्वपूर्ण कदम

उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के सीनियर DCM कुलदीप तिवारी ने बताया कि लॉजिस्टिक्स सेवाओं के आधुनिकीकरण व ग्राहक सुविधाओं के विस्तार की दिशा में रेलवे का यह महत्वपूर्ण कदम है। यह परियोजना दो वर्षों के लिए स्वीकृत की गई है।

सोनिक गुड्स शेड कैटेगरी वन का है

आवश्यकता के अनुसार इसे बढ़ाया भी जा सकता है। बताया कि सोनिक गुड्स शेड कैटेगरी वन का है। यहां पर हर महीने लगभग 13 रेक से खाद्य पदार्थ, अनाज, उर्वरक, सीमेंट आदि आते हैं। लगभग 80 कोच का पिसमील लोडिंग संभालता है।

बताया कि कॉन्कोर ही गुड्स शेड का पूरा प्रबंधन, सफाई, परिसंपत्तियों के रखरखाव, सभी कानूनी और पर्यावरणीय नियमों की जिम्मेदारी संभालेगा। गोदाम, कंटेनर स्टोरेज आदि का विकास भी करेगा। रेलवे की जमीनों पर बनने वाली परिसंपत्तियां रेलवे की ही होंगी। यहां पर मजदूरों और व्यापारियों के लिए सार्वजनिक उपयोग की सुविधाएं भी होंगी।

ग्राहकों को एकीकृत लॉजिस्टिक्स समाधान उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल

DRM सुनील कुमार वर्मा ने कहा कि यह परियोजना रेलवे परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग, माल ढुलाई की दक्षता बढ़ाने और ग्राहकों को एकीकृत लॉजिस्टिक्स समाधान उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। डोर-टू-डोर लॉजिस्टिक्स सेवा भारतीय रेल की लास्ट माइल कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी। इस अवसर पर वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबन्धक/फ्रेट, गौरव दीक्षित सहित अधिकारी एवं व्यापारी उपस्थित रहे।

• CONCOR गुड्स शेड के संपूर्ण प्रबंधन, सफाई, परिसंपत्तियों के रखरखाव तथा सभी वैधानिक एवं पर्यावरणीय नियमों के अनुपालन की जिम्मेदारी संभालेगा।

• ग्राहकों को हैंडलिंग एवं डोर-टू-डोर लॉजिस्टिक्स सेवाएँ प्रदान की जाएंगी, जिनके शुल्क CONCOR द्वारा निर्धारित किए जाएंगे।

• आवश्यक बुनियादी ढांचा (Infrastructure) जैसे गोदाम, कंटेनर स्टोरेज आदि का विकास CONCOR अपने स्वयं के व्यय पर करेगा।

• रेलवे भूमि पर निर्मित सभी परिसंपत्तियाँ भारतीय रेल की संपत्ति रहेंगी।

• घाट क्षेत्र में लगभग 20–26 कंटेनर (20 फीट) अस्थायी गोदामों के रूप में स्थापित किए जाएंगे तथा मजदूरों एवं व्यापारियों हेतु शौचालय भी निर्मित किए जाएंगे।

• CONCOR द्वारा संभाले गए कार्गो को कंटेनरों में स्थानांतरित किया जाएगा ताकि प्लेटफॉर्म पर कोई माल अवशिष्ट न रहे एवं आगामी उपयोग के लिए स्थान उपलब्ध रहे।

• गुड्स शेड सामान्य उपयोगकर्ता सुविधा (Common User Facility) के रूप में कार्य करता रहेगा।

• ग्राहकों के लिए CONCOR के माध्यम से कार्य कराना अनिवार्य नहीं होगा।

• रेलवे द्वारा संकलित टर्मिनल शुल्क (Terminal Charge) का मासिक/त्रैमासिक आधार पर CONCOR को हस्तांतरण किया जाएगा।

• CONCOR द्वारा संभाले गए रेक्स पर कोई व्हार्फेज शुल्क देय नहीं होगा, जबकि अन्य रेक्स पर सामान्य शुल्क लागू रहेगा।

• डिमरेज शुल्क सभी रेक्स पर सामान्य रूप से लागू रहेगा।

• ग्राहकों को यह विकल्प रहेगा कि वे स्वयं, CONCOR अथवा किसी तृतीय पक्ष के माध्यम से हैंडलिंग कार्य कराएँ।

लॉजिस्टिक्स समाधान उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल

यह परियोजना रेलवे परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग, माल ढुलाई की दक्षता बढ़ाने, तथा ग्राहकों को एकीकृत लॉजिस्टिक्स समाधान उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।“डोर-टू-डोर लॉजिस्टिक्स सेवा” भारतीय रेल की ‘लास्ट माइल कनेक्टिविटी’ को सुदृढ़ करेगी तथा व्यापारियों और उद्योगों को अधिक सुगम, सुरक्षित एवं समयबद्ध परिवहन सुविधा प्रदान करेगी।

 

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