नई दिल्ली, 16 नवंबर
भारत और यूरेशियन आर्थिक संघ (EAEU) के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) वार्ता को गति देने के लिए वाणिज्य सचिव श्री राजेश अग्रवाल ने मॉस्को में उच्च स्तरीय बैठकों की श्रृंखला में हिस्सा लिया। उन्होंने यूरेशियन आर्थिक आयोग के व्यापार प्रभारी मंत्री श्री आंद्रे स्लेपनेव, रूसी उद्योग एवं व्यापार उप मंत्री श्री मिखाइल युरिन तथा भारतीय एवं रूसी उद्योग प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत संवाद किया।
इन चर्चाओं का मुख्य फोकस भारत–रूस व्यापार संबंधों में विविधता लाना, आपूर्ति श्रृंखलाओं को लचीला बनाना, नियामकीय पारदर्शिता सुनिश्चित करना और दोनों देशों के औद्योगिक विकास को संतुलित गति प्रदान करना रहा। यह पहल दोनों देशों के नेतृत्व द्वारा निर्धारित 2030 तक 100 अरब अमेरिकी डॉलर द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ाई जा रही है।
मंत्री स्लेपनेव के साथ बैठक में वाणिज्य सचिव ने वस्तुओं के क्षेत्र में भारत–EAEU मुक्त व्यापार समझौते की प्रगति का आकलन किया।
20 अगस्त 2025 को हस्ताक्षरित संदर्भ शर्तें (ToR)
18 महीने की कार्य योजना
एमएसएमई, किसानों और मछुआरों के लिए नए बाज़ारों में प्रवेश पर जोर
नेताओं के निर्देशानुसार आगे बढ़ते हुए सेवाओं और निवेश के क्षेत्रों को भी सहयोग रूपरेखा में शामिल करने पर विचार किया जाएगा।
रूसी उद्योग एवं व्यापार उप मंत्री श्री मिखाइल युरिन के साथ बैठक में व्यापार विविधीकरण तथा खनिज सहयोग पर विस्तृत चर्चा हुई।
दोनों पक्षों ने—
फार्मास्यूटिकल्स
दूरसंचार उपकरण
मशीनरी
ऑटोमोबाइल
चमड़ा
रसायन
जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में समयबद्ध सहयोग मॉडल पर विचार किया।
इसके अलावा, गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने के लिए तिमाही “नियामक-से-नियामक” संपर्क व्यवस्था बनाने पर सहमति बनी। इसमें प्रमाणन प्रक्रियाओं, कृषि व समुद्री उत्पादों के सूचीकरण तथा एकाधिकार-रोधी उपायों पर समन्वय शामिल रहेगा।
रसद, भुगतान प्रणालियों और गुणवत्ता मानकों से संबंधित व्यावहारिक उपायों पर भी चर्चा हुई, जिससे व्यापार सुगमता को बढ़ावा मिलेगा।
मॉस्को में आयोजित उद्योग सम्मेलन में वाणिज्य सचिव ने भारतीय और रूसी उद्योग जगत के शीर्ष प्रतिनिधियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि उद्योगों को अपनी परियोजनाओं को 2030 व्यापार लक्ष्य के अनुरूप तैयार करना चाहिए।
उन्होंने भारत की —
तेजी से विकसित हो रही लॉजिस्टिक्स संरचना
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर
संयुक्त निवेश और सह-उत्पादन मॉडल
—का उल्लेख करते हुए इन क्षेत्रों में अपार अवसरों की ओर ध्यान आकर्षित किया।
वाणिज्य सचिव ने कहा कि नियोजित परियोजनाओं को ठोस, क्रियान्वयन योग्य अनुबंधों में बदलने की जरूरत है, जिससे दोनों देशों के लोगों के लिए रोजगार, मूल्य-वृद्धि और दीर्घकालिक समृद्धि सुनिश्चित हो सके।
भारत 2047 तक “विकसित भारत” का लक्ष्य प्राप्त करने की दिशा में कार्य कर रहा है और इस प्रक्रिया में रूस को एक मज़बूत और विश्वसनीय साझेदार के रूप में देखता है। दोनों देशों के बीच औद्योगिक, तकनीकी और निर्यात सहयोग को गहरा करने के प्रयास तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
भारत–EAEU FTA वार्ता की यह समीक्षा इसी व्यापक आर्थिक रोडमैप का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है।
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