मशरूम खेती से आत्मनिर्भरता की राह, जानें क्या आने वाला है बदलाव
एनएचआरडीएफ का पाँच दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण सफल
नई दिल्ली।
मशरूम उत्पादन खाद्य एवं पोषण सुरक्षा के साथ-साथ किसानों और युवाओं के लिए आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (एनएचआरडीएफ) में आयोजित “मशरूम उत्पादन तकनीक एवं सस्योत्तर प्रबंधन” प्रशिक्षण में उत्तर प्रदेश, हरियाणा, बिहार, राजस्थान और दिल्ली से 32 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजबीर सिंह ने दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ किया। सहायक निदेशक डॉ. एस.के. तिवारी ने संस्थान की अनुसंधान गतिविधियों, विस्तार कार्यक्रमों और किसानों के लिए संचालित योजनाओं की जानकारी दी।
खाद्य, पोषण और आय सुरक्षा पर विशेष जोर
समापन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने कहा कि मशरूम उत्पादन खाद्य एवं पोषण सुरक्षा के साथ-साथ किसानों और युवाओं के लिए आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। प्रतिभागियों को अपने-अपने क्षेत्रों में प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान का प्रसार करने और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर मशरूम उद्यम स्थापित करने के लिए प्रेरित किया गया।
प्रशिक्षण के दौरान धान की पराली और गेहूं के भूसे जैसे कृषि अवशेषों के वैज्ञानिक उपयोग और निस्तारण पर विशेष सत्र आयोजित किए गए। पराली जलाने जैसी हानिकारक प्रथाओं से बचने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता पर बल दिया गया।
व्यावहारिक अनुभव से बढ़ा आत्मविश्वास
प्रतिभागियों को हरियाणा के मुरथल स्थित HAIC Mushroom Research & Development Centre का भ्रमण कराया गया, जहां उन्नत मशरूम उत्पादन तकनीकों की जानकारी दी गई। साथ ही सोनीपत में प्रगतिशील किसान बिजेंद्र धनखड़ के मशरूम फार्म का भी दौरा कराया गया, जिससे प्रतिभागियों को व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ।
विभिन्न प्रजातियों की खेती पर विस्तृत मार्गदर्शन
प्रशिक्षण समन्वयक एस.सी. तिवारी ने बटन, डिंगरी (ऑयस्टर), मिल्की और शिटाके मशरूम की खेती, उत्पादन तकनीक, रोग प्रबंधन और विपणन रणनीतियों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने मशरूम उत्पादन को कम लागत में अधिक लाभ देने वाला स्वरोजगार मॉडल बताया।
प्रमाणपत्र वितरण के साथ समापन
समापन अवसर पर प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें मशरूम उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन की व्यवहारिक समझ मिली है।
कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत कर सभी प्रशिक्षकों, अधिकारियों और प्रतिभागियों के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
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