सांस फूले तो सोचिए COPD, जानें क्या है ये समस्या?

विश्व सीओपीडी दिवस 2025: केजीएमयू में जागरूकता कार्यक्रम, विशेषज्ञों ने बढ़ते खतरे पर जताई चिंता

483

Lucknow: विश्व सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) दिवस 2025 के अवसर पर किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग ने “Short of Breath? Think COPD” यानी “सांस फूले तो सोचिए सीओपीडी”—के तहत आम जनता को बीमारी के शुरुआती संकेत, कारणों और रोकथाम के उपायों के बारे में जागरूक करने पर जोर दिया गया।

कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष प्रो. वेद प्रकाश के साथ रेस्पीरेटरी मेडिसिन विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. राजेंद्र प्रसाद, प्रो. आर.ए.एस. कुषवाहा, डॉ. संदीप गुप्ता तथा विभाग के अन्य विशेषज्ञ डॉ. सचिन कुमार, डॉ. मोहम्मद आरिफ, डॉ. अनुराग त्रिपाठी, डॉ. यश जगधारी और डॉ. रिचा त्यागी मौजूद रहीं।

सीओपीडी—एक बढ़ती वैश्विक चुनौती

कार्यक्रम में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार—

  • दुनिया भर में 2025 में 50 करोड़ से अधिक लोग सीओपीडी से पीड़ित रहे।
  • 2050 तक इसके मरीजों की संख्या 60–65 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है।
  • सीओपीडी दुनिया में मृत्यु का तीसरा सबसे बड़ा कारण है।
  • वर्ष 2019 में अकेले 32 लाख से अधिक मौतें इसी बीमारी से हुईं।
  • 2023 में वैश्विक अनुमान के मुताबिक लगभग 48 करोड़ मरीज दर्ज किए गए।
  • भारत में 5.5 करोड़ से अधिक लोग सीओपीडी से प्रभावित हैं।
  • धूम्रपान लगभग 40 प्रतिशत मामलों का प्रमुख कारण है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में बायोमास ईंधन, जैसे लकड़ी, उपले और कोयले का उपयोग, सीओपीडी का मुख्य खतरा बनता जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, लगभग एक-तिहाई मरीज गैर-धूम्रपान करने वाले होते हैं, जो वायु प्रदूषण, घरेलू धुएं और व्यावसायिक प्रदूषकों के संपर्क में आने से बीमारी का शिकार होते हैं।


सीओपीडी क्या है?

यह फेफड़ों की प्रगतिशील और गंभीर बीमारी है, जिसमें क्रोनिक ब्रोंकाइटिस और एम्फाइसीमा शामिल हैं। इसके प्रमुख लक्षण—

  • लगातार खांसी
  • सांस लेने में कठिनाई
  • घरघराहट
  • सीने में जकड़न
  • बार-बार संक्रमण
  • थकान
  • अनचाहा वजन घटना
  • दैनिक गतिविधियों में परेशानी

यदि इलाज समय पर न मिले तो बीमारी गंभीर रूप से बढ़ सकती है और जानलेवा अटैक की स्थिति पैदा कर सकती है।

सीओपीडी के मुख्य कारण

  • तंबाकू धूम्रपान
  • परोक्ष धूम्रपान
  • कार्यस्थल पर रसायन, धूल और धुएं का संपर्क
  • घर के भीतर बायोमास ईंधन से उत्पन्न धुआं
  • वायु प्रदूषण
  • बचपन में बार-बार होने वाले संक्रमण
  • अस्थमा जैसी पूर्व-स्थितियां
  • खराब पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच
  • दुर्लभ अनुवांशिक कारण—अल्फा-1 एंटीट्रिप्सिन की कमी

सीओपीडी पर वायु प्रदूषण का गहरा प्रभाव

चिकित्सकों ने बताया कि पीएम2.5, पीएम10, एनओ₂ और एसओ₂ जैसे प्रदूषकों से फेफड़ों में सूजन बढ़ती है, जिससे—

  • लक्षण गंभीर होते हैं
  • अस्पताल में भर्ती होने की संभावना बढ़ती है
  • फेफड़ों की कार्यक्षमता तेजी से घटती है
  • मृत्यु दर बढ़ती है
  • जीवन की गुणवत्ता प्रभावित होती है

विशेषज्ञों ने स्मॉग और प्रदूषण के दिनों में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी।


केजीएमयू की उन्नत सुविधाएं और प्रयास

पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग में सीओपीडी के सटीक निदान के लिए अत्याधुनिक जांच सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिनमें शामिल हैं—

  • स्पायरोमेट्री
  • बॉडी प्लेथिस्मोग्राफी
  • डिफ्यूजन स्टडी
  • फोर्स्ड ऑसिलोमेट्री (F.O.T.)
  • हाई-रिज़ॉल्यूशन सीटी स्कैन

विभाग में आधुनिक वेंटिलेटरों से सुसज्जित उत्कृष्ट आईसीयू भी उपलब्ध है। संक्रमण नियंत्रण प्रोटोकॉल के चलते यहां वेंटिलेटर-संबंधी निमोनिया (VAP) का जोखिम 10 प्रतिशत से भी कम है, जो राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धि मानी जाती है।


विशेषज्ञों की अपील: लक्षणों को अनदेखा न करें

प्रो. वेद प्रकाश ने कहा कि सांस फूलना सामान्य नहीं है। यह भविष्य में सीओपीडी का संकेत हो सकता है और इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। लक्षण दिखते ही जांच कराना और प्रारंभिक उपचार जरूरी है।

विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि—

  • नियमित फेफड़ों के कार्य परीक्षण कराएं
  • धूम्रपान छोड़ें
  • प्रदूषण से बचाव करें
  • टीकाकरण समय पर कराएं
  • स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं

 

 

Comments are closed.