नाक में सरक आए दिमाग का ऑपरेशन कर 33 वर्षीय महिला की जान बचाई
मणिपाल हॉस्पिटल द्वारका के डॉक्टरों ने किया चमत्कार!
नई दिल्ली, 17 अक्टूबर
दिल्ली स्थित मणिपाल हॉस्पिटल द्वारका के डॉक्टरों ने एक अत्यंत दुर्लभ और जटिल सर्जरी को अंजाम देते हुए 33 वर्षीय महिला की जान बचाई — जिनका दिमाग का एक हिस्सा नाक और साइनस में सरक आया था!
महिला कई महीनों से नाक बंद रहने और लगातार नाक बहने की शिकायत से परेशान थीं। जांच के बाद पता चला कि क्रेनियल बेस — यानी दिमाग और नाक की गुहा को अलग करने वाली पतली हड्डी — धीरे-धीरे घिस चुकी थी। इसके चलते दिमाग के ऊतक (Brain Tissue) नाक और मुँह के अंदर तक पहुँच गए थे, जो साफ़ दिखाई दे रहे थे।
मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए अस्पताल की न्यूरोसर्जरी और ईएनटी टीम ने मिलकर लगभग आठ घंटे लंबी सर्जरी की। इसमें एंडोस्कोपिक और ट्रांसक्रेनियल तकनीक का इस्तेमाल कर दिमाग को उसकी मूल स्थिति में वापस लाया गया और क्रेनियल बेस का पुनर्निर्माण किया गया।
अगर यह सर्जरी समय पर न होती, तो मरीज को मेनिंजाइटिस, खतरनाक संक्रमण, स्ट्रोक और जानलेवा रक्तस्राव का खतरा था।
“नाक बंद रहने के पीछे छिपी थी दुर्लभ बीमारी” — डॉ. आशीष वशिष्ठ
मणिपाल हॉस्पिटल द्वारका के एचओडी एवं कंसल्टेंट – ईएनटी डॉ. आशीष वशिष्ठ ने बताया,
“जब मरीज हमारे पास आईं, तो उन्हें केवल नाक बंद रहने और बहने की शिकायत थी। एंडोस्कोपिक जांच के बाद हमने दुर्लभ स्थिति का अंदेशा जताया। आगे की सीटी और एमआरआई स्कैन में पाया गया कि दिमाग का हिस्सा नैसल कैविटी में पहुंच चुका है। यह सर्जरी तकनीकी रूप से अत्यंत जटिल थी और इसमें उच्च स्तर की सटीकता की जरूरत थी। इस सफलता ने मल्टीडिसिप्लिनरी टीमवर्क और सटीक निदान के महत्व को दर्शाया।”
“दिमाग और रक्तवाहिनियां दोनों नीचे सरक आई थीं” — डॉ. अनुराग सक्सेना
क्लस्टर हेड – दिल्ली एनसीआर, न्यूरोसर्जरी, डॉ. अनुराग सक्सेना ने कहा,
“यह मामला बेहद चुनौतीपूर्ण था क्योंकि दिमाग के साथ उसकी रक्तवाहिनियां भी नीचे सरक गई थीं। ज़रा-सी गलती जानलेवा स्ट्रोक का कारण बन सकती थी। दिमाग के आधे हिस्से को वापस उसकी जगह लाने और क्रेनियल बेस को दोबारा बनाने में बेहद सावधानी रखी गई। आज मरीज पूरी तरह स्वस्थ हैं और सामान्य जीवन जी रही हैं।”
Comments are closed.