अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा पाकिस्तान, बंद किये पुराने शरणार्थी शिविर, लाखों अफगानों को देश से निकाला
खैबर पख्तूनख्वा (KP) प्रांत में ऐसे पाँच प्रमुख शिविरों को बंद करने का आदेश
Islamabad: पाकिस्तान अपनी हरकतों को नहीं सुधारना चाहता है। वहां की सरकार ने अफगान शरणार्थी शिविरों को बंद करने का बड़ा फैसला लिया है। ये शिविर 40 वर्षों से देश में सक्रिय था। खैबर पख्तूनख्वा (KP) प्रांत में ऐसे पाँच प्रमुख शिविरों को बंद करने का आदेश दिया गया है। इन शिविरों में हरिपुर जिले के तीन, चित्राल का एक और अपर दीर का एक शिविर शामिल हैं। अकेले हरिपुर के पनियन शिविर में 1,00,000 से अधिक शरणार्थी रह रहे थे।
अफगान शरणार्थियों को वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू
सरकार ने इस कदम का कारण आतंकवाद और बढ़ते अपराध को बताया है। अक्टूबर 2023 से बिना दस्तावेज़ वाले अफगान शरणार्थियों को वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हाल ही में कहा कि अफगान शरणार्थी बलूचिस्तान और KP में आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े हो सकते हैं। वहीं पाक उच्च न्यायालय ने उन 40 अफगान नागरिकों के निर्वासन पर अस्थायी रोक लगा दी है, जो पाकिस्तानी महिलाओं से शादीशुदा हैं।
शरणार्थियों के लौटने की प्रक्रिया को किया जा रहा मॉनिटरिंग
कोर्ट ने कहा कि यह रोक तब तक रहेगी जब तक देश का शीर्ष पंजीकरण निकाय उनके नागरिकता आवेदन पर फैसला नहीं करता। इस निर्णय से पाकिस्तान में शरणार्थियों की सुरक्षा, रोजगार और सामाजिक संरचना पर भी प्रभाव पड़ने की संभावना जताई जा रही है। स्थानीय प्रशासन ने शरणार्थियों के लौटने की प्रक्रिया को कदम-दर-कदम मॉनिटर करने का आदेश दिया है।
शरणार्थी बोले-जबरन देश से बाहर निकाल रही है पाकिस्तानी सरकार
वहीं पाकिस्तान में अफगान शरणार्थियों के प्रतिनिधियों ने कहा है कि पाकिस्तानी सरकार उन्हें जबरन देश से बाहर निकाल रही है। 31 अगस्त को निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद यह प्रक्रिया तेज़ कर दी गई है। अफगान शरणार्थियों ने कहा कि वे लगभग 40 वर्षों से पाकिस्ताान में व्यापार कर रहे हैं और इतने कम समय में सब कुछ खत्म करना असंभव है। उन्होंने कहा कि शरणार्थियों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की अपील के बावजूद पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा उन्हें निर्वासित करने का काम जारी है।
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