यूपी में चलेगा ‘स्टॉप डायरिया अभियान’, सभी CMO सहित संबंधित विभागों को निर्देश जारी

"डायरिया की रोकथाम- सफाई और ORS से रखें ध्यान" थीम के साथ होंगी विभिन्न गतिविधियां

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इंडिन्यूज लाइन, लखनऊ:
उत्तर प्रदेश में मंगलवार से ‘स्टॉप डायरिया अभियान’ चलेगा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की निदेशक डॉ. पिंकी जोवेल ने इस संबंध में सभी जिलों के मुख्य चिकित्साधिकारियों (CMO) सहित संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। “डायरिया की रोकथाम- सफाई और ORS से रखें ध्यान” थीम के साथ अभियान चलाकर कई प्रमुख गतिविधियां होंगी।

स्वास्थ्य के अलावा इन सभी विभागों के कर्मचारी करेंगे सहयोग
इस अभियान में स्वास्थ्य के साथ- साथ महिला एवं बाल विकास, ग्राम्य विकास, पेयजल एवं स्वच्छता, पंचायती राज, शिक्षा विभाग एवं ICDS जैसे कई विभाग सक्रिय सहयोग कर रहे हैं।

प्री-मानसून एवं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से बढ़ते हैं डायरिया के मामले: डॉ. पिंकी जोवेल
डॉ. पिंकी जोवेल ने बताया कि प्री-मानसून एवं मानसून के दौरान, विशेषकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में डायरिया के मामले तेजी से बढ़ते हैं। ऐसे में जनजागरूकता को बढ़ाने, स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारी मजबूत करने, ORS और जिंक के उपयोग को प्रोत्साहित करने तथा डायरिया की रोकथाम को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है। डायरिया के चिन्हित परिवारों को ओआरएस पैकेट और जिंक की गोलियों का वितरण होगा।

11 वर्षों से संचालित हो रहा है यह अभियान: डॉ. मिलिंद वर्धन

NHM में बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के महाप्रबंधक डॉ. मिलिंद वर्धन बताया कि यह अभियान विगत 11 वर्षों से संचालित हो रहा है। पूर्व में यह ‘सघन दस्त नियंत्रण पखवारा’ (IDCF) के नाम से जाना जाता था, जिसे अब ‘स्टॉप डायरिया अभियान’ नाम दिया गया है। इस पहल के साथ-साथ सार्वजनिक टीकाकरण कार्यक्रम में रोटावायरस वैक्सीन को शामिल करने का भी सकारात्मक असर देखने को मिला है।

डायरिया से पीड़ित बच्चों की संख्या में आई उल्लेखनीय कमी
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण- 5 (NFHS-5) के अनुसार, पांच वर्ष से कम उम्र के डायरिया से पीड़ित बच्चों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है— NFHS-4 में यह आंकड़ा 15% था, जबकि NFHS-5 में घटकर 5.6% रह गया है, जो कि राष्ट्रीय औसत (7.3%) से बेहतर है।

आशा कार्यकर्ता घर- घर संपर्क कर अपील करेंगी

अभियान में जनजागरूकता कार्यक्रम एवं स्कूल स्तर पर संवाद के अलावा आशा कार्यकर्ता घर- घर संपर्क और व्यवहार परिवर्तन की अपील करेंगी। बच्चों में डायरिया से बचाव के लिए साफ- सफाई, छह माह तक शिशु को केवल माँ का दूध (स्तनपान) कराएं जाने समेत जरूरी सावधानियां के बारे में अवगत कराएंगी।

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