105 वर्षीय मोरनी देवी ने सिर्फ 24 घंटे में दोबारा चलना शुरू किया
मैक्स अस्पताल में सफल हिप रिप्लेसमेंट ने दी नई ज़िंदगी
नई दिल्ली, 10 अक्टूबर
उम्र सिर्फ एक संख्या है — इसे सच साबित किया है 105 वर्षीय मोरनी देवी ने, जिन्होंने गिरने से लगी गंभीर चोट के बाद सिर्फ 24 घंटे में दोबारा चलना शुरू कर दिया। यह संभव हुआ मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, शालीमार बाग के सीनियर डायरेक्टर (रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट्स एंड ऑर्थोपेडिक्स) डॉ. सायमन थॉमस और उनकी टीम की असाधारण सर्जरी के ज़रिए।
डॉ. थॉमस ने मोरनी देवी पर बाइपोलर हेमिआर्थ्रोप्लास्टी नामक जटिल हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी 30 सितंबर 2025 को सफलतापूर्वक की। सर्जरी लगभग 20 से 25 मिनट तक चली और इसे बेहद सावधानी से प्लान किया गया ताकि मरीज के शरीर पर न्यूनतम असर पड़े और रिकवरी तेज़ हो सके।
मोरनी देवी को सर्जरी से एक दिन पहले गिरने के कारण फीमर नेक फ्रैक्चर हो गया था, जिससे वे पूरी तरह से चलने-फिरने में असमर्थ हो गई थीं। डॉक्टरों की टीम ने उम्र के बावजूद उनका विस्तृत प्री-ऑपरेटिव मूल्यांकन किया और पाया कि सर्जरी सुरक्षित रूप से की जा सकती है।
भारत में 50 वर्ष से अधिक आयु की लगभग 50% महिलाएं और 20% पुरुष हिप फ्रैक्चर से प्रभावित होते हैं। वर्ष 2026 तक ऐसे मामलों की संख्या 6 लाख वार्षिक तक पहुंचने का अनुमान है। आम तौर पर इन मामलों में मृत्यु दर 15% से 36% तक होती है, और रिकवरी में कई महीने से लेकर एक वर्ष तक लग सकता है। ऐसे में 105 वर्ष की उम्र में सिर्फ 24 घंटे में चलने लगना चिकित्सा क्षेत्र में एक प्रेरणादायक उपलब्धि है।
डॉ. थॉमस ने कहा,
“यह मामला साबित करता है कि उम्र कभी भी जीवन बदलने वाली सर्जरी में बाधा नहीं होनी चाहिए। सही योजना, सर्जिकल दक्षता और उचित पोस्ट-ऑपरेटिव केयर के साथ 100 वर्ष से अधिक उम्र के मरीज भी दोबारा चल-फिर सकते हैं और बेहतर जीवन जी सकते हैं। किसी को फिर से चलने में सक्षम देखना डॉक्टर के लिए सबसे बड़ी संतुष्टि होती है।”
सर्जरी के बाद मोरनी देवी ने भावुक होकर कहा,
“मैंने तो सोच लिया था कि अब दोबारा कभी नहीं चल पाऊंगी, लेकिन डॉ. थॉमस और उनकी टीम ने मुझे नई ज़िंदगी दी। मैं अगले ही दिन खड़ी हो गई और अब सहारे के साथ धीरे-धीरे चल रही हूं।”
पहले ऐसी आयु के लोगों को सर्जरी के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता था, लेकिन यह केस बताता है कि सही जांच और आधुनिक ऑर्थोपेडिक तकनीकों के साथ जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी अब वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी सुरक्षित और प्रभावी है।
समय पर सर्जरी न केवल गतिशीलता लौटाती है बल्कि निमोनिया और इन्फेक्शन जैसे निष्क्रियता से जुड़ी जटिलताओं से भी बचाव करती है।
यह सफलता आधुनिक चिकित्सा की उस क्षमता को दर्शाती है जो किसी भी उम्र में व्यक्ति को स्वतंत्रता और जीवन की गुणवत्ता लौटाने में सक्षम है। साथ ही, यह डॉ. सायमन थॉमस की उस विशेषज्ञता को भी रेखांकित करती है जिसके चलते वे रोबोटिक और पारंपरिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी के क्षेत्र में देश के अग्रणी विशेषज्ञों में गिने जाते हैं।
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